
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ के एक व्यक्ति की हिरासत में हुई मौत की जांच CBI को सौंप दी। साथ ही राज्य सरकार को मृतक की विधवा और दो नाबालिग बेटियों को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि वह जांच तेजी से पूरी करे और अगली सुनवाई की तारीख 13 अक्टूबर को रिपोर्ट पेश करे।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने 4 अगस्त को इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि वह श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सर्वन तामरे की मौत के कारणों की जांच के लिए नियमित आपराधिक मामला दर्ज करे और जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपे।
हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए श्रवण की हिरासत में हुई मौत के कारणों की जांच CBI को सौंपी जानी चाहिए। जांच पूरी होने के बाद हिरासत में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोर्ट ने उन अधिकारियों के आचरण की भी जांच के निर्देश दिए, जिन्होंने न्यायिक जांच के निष्कर्षों के बावजूद उचित कदम नहीं उठाए।
हाई कोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती
यह मामला मृतक की पत्नी लहरा बाई तामरे और उनकी बेटियों संध्या और साक्षी की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 3 अक्टूबर 2024 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट ने हिरासत में मौत के मामले में परिवार को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया था, लेकिन FIR दर्ज करने और मौत के कारणों की जांच के लिए कोई निर्देश नहीं दिया था।
18 जनवरी 2024 को हुई थी गिरफ्तारी
श्रवण सूर्यवंशी को 18 जनवरी 2024 को बिलासपुर जिले की सीपत पुलिस ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत छह लीटर कच्ची शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद उसे केंद्रीय जेल बिलासपुर भेजा गया था। 21 जनवरी 2024 को उसकी तबीयत खराब होने पर उसे बिलासपुर के CIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 22 जनवरी को उसकी मौत हो गई।









