
Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक व्यावसायिक इमारत में स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग अब एक भयावह महात्रासदी का रूप लेती जा रही है। सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से मिल रही बेहद दुखद खबर के मुताबिक, रेस्क्यू टीम ने अब तक मलबे और धुएं के गुबार के बीच से 6 से ज्यादा शवों (डेडबॉडी) को बाहर निकाल लिया है। इमारत के भीतर धुआं और लपटें इतनी भीषण थीं कि कई छात्र-छात्राओं के जिंदा जलने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। प्रशासनिक गलियारों और अस्पताल सूत्रों के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों की कुल संख्या 10 से भी अधिक हो सकती है।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे डिप्टी सीएम, DGP और ACS होम
घटना की संवेदनशीलता और भयावहता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन के शीर्ष अधिकारी और राजनेता तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। मौके पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) ब्रजेश पाठक, पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव गृह खुद मौजूद हैं। शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में राहत और बचाव कार्यों की सीधे मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रशासनिक अमले को अलर्ट पर रखा गया है और केजीएमयू ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों की विशेष टीमें घायलों के इलाज में जुटी हैं।
दम घुटने और छत का ताला बंद होने से बिगड़े हालात
राहत और बचाव कार्य (रेस्क्यू ऑपरेशंस) में लगी टीमें लगातार गैस मास्क और आधुनिक उपकरणों के साथ बिल्डिंग के अंदर कमरों और लाइब्रेरी ब्लॉक को खंगाल रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि बच्चों को संभलने का मौका नहीं मिला। कुछ चश्मदीदों के मुताबिक, इमारत की छत पर जाने वाला दरवाजा बंद था, जिसकी वजह से छात्र ऊपर नहीं भाग सके और नीचे घने, जहरीले काले धुएं ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। दमकल की 14 से अधिक गाड़ियां और हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मदद से रेस्क्यू टीमें अभी भी अंदर फंसे संभावित लोगों को निकालने का प्रयास कर रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पहली प्राथमिकता अंदर फंसे हर एक व्यक्ति तक पहुंचना है।









