
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार (13 मई) से सोना, चांदी एवं अन्य कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) दरों में बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। अधिसूचना संख्या 16/2026-कस्टम्स के तहत जारी नई दरें आज से प्रभावी हो गई हैं, जिसके चलते सोने और चांदी की ज्वैलरी फाइंडिंग्स पर 5 प्रतिशत, प्लेटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 प्रतिशत और प्रीशियस मेटल स्पेंट कैटालिस्ट पर 4.35 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इस फैसले से ज्वैलरी उद्योग, बुलियन कारोबार और आम खरीदारों पर सीधा असर पड़ना तय है।
बुनियादी सीमा शुल्क में हुआ बड़ा इजाफा
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने और चांदी पर बुनियादी सीमा शुल्क (बेसिक कस्टम ड्यूटी) को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही, 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) भी लगाया गया है। इस तरह सोने-चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क 6 प्रतिशत से सीधे 15 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
ज्वैलरी फाइंडिंग्स और प्लैटिनम पर भी शुल्क संशोधित
नई अधिसूचना केवल कच्चे सोने-चांदी तक सीमित नहीं है। सरकार ने ज्वैलरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले छोटे कलपुर्जों (फाइंडिंग्स) जैसे हुक, क्लैप, पिन और स्क्रू बैक पर भी शुल्क दरें तय कर दी हैं। सोने और चांदी की फाइंडिंग्स पर 5 प्रतिशत तथा प्लैटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 प्रतिशत शुल्क लागू किया गया है। वहीं, रीसाइक्लिंग और रिकवरी उद्देश्यों से आयात होने वाले प्रीशियस मेटल स्पेंट कैटालिस्ट पर 4.35 प्रतिशत की रियायती दर रखी गई है, जो कड़े अनुपालन मानदंडों के अधीन होगी।
क्यों उठाया गया यह कदम
सरकार के इस निर्णय के पीछे बढ़ता व्यापार घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का स्वर्ण आयात रिकॉर्ड 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। देश का कुल व्यापार घाटा इस दौरान 333.2 बिलियन डॉलर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि गैर-आवश्यक आयात को नियंत्रित करने और रुपये को समर्थन देने के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।
बाजार और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। कारोबारियों के अनुसार, ज्वैलरी निर्माताओं की उत्पादन लागत बढ़ेगी और सोना-चांदी खरीदना आम लोगों के लिए और महंगा हो जाएगा। हालांकि, बुलियन कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि शुल्क में भारी वृद्धि से तस्करी और ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिल सकता है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी इस आशंका पर चिंता जताई है।
क्या है सरकार का तर्क
सरकार का मानना है कि इस फैसले से जहां विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा, वहीं चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। रियायती दरों के प्रावधानों से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार रीसाइक्लिंग आधारित घरेलू मूल्य श्रृंखला को प्रोत्साहन देना चाहती है।









