
नई दिल्ली: अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने भारत के ऊर्जा बदलाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ बिजली की कीमतों को किफायती और आपूर्ति को भरोसेमंद बनाए रखना जरूरी है। अदाणी ने चेतावनी दी कि ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ने की प्रक्रिया ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़े, कारखाने बंद हों या औद्योगिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाए।
ग्रीन एनर्जी सस्ती और भरोसेमंद बनाना जरूरी
दिल्ली में माइकल ब्लूमबर्ग से मुलाकात के बाद बुधवार को लिंक्डइन पर एक पोस्ट में गौतम अदाणी ने कहा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वच्छ ऊर्जा को आर्थिक रूप से व्यवहारिक कैसे बनाया जाता है और देश के विकास के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का विस्तार किस तरह किया जाता है।
उन्होंने लिखा, “कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना कोई ऐसा वैचारिक फरमान नहीं हो सकता, जो आम नागरिकों की पहुंच से ऊर्जा को बाहर कर दे, कारखानों को बंद कराए या ग्लोबल साउथ की प्रगति रोक दे।”
अदाणी के मुताबिक, ऊर्जा परिवर्तन तभी सफल होगा, जब स्वच्छ ऊर्जा घरों और कारोबारों के लिए किफायती होने के साथ भरोसेमंद विकल्प भी बने। उन्होंने ग्रीन एनर्जी अपनाने की अतिरिक्त लागत कम करने पर जोर दिया। साथ ही, जलवायु में बढ़ती अनिश्चितता के बीच पारंपरिक ऊर्जा प्रणालियों पर लगातार निर्भर रहने को लेकर भी आगाह किया।
ग्रीन एनर्जी की अतिरिक्त लागत घटाने पर जोर
गौतम अदाणी ने कहा कि वास्तविक प्रगति के लिए निवेश, नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इसका उद्देश्य ग्रीन एनर्जी की अतिरिक्त लागत को लगातार कम करना होना चाहिए, ताकि स्वच्छ बिजली सस्ता और बेहतर विकल्प बन सके।
उन्होंने भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली आपूर्ति, औद्योगिक क्षमता और डिजिटल पहुंच के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, देश के आर्थिक विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए इन क्षेत्रों में निवेश जरूरी है।
देश के विकास के लिए चार चीजें अहम
अदाणी ने कहा कि दीर्घकालिक विकास के लिए केवल बंदरगाह, बिजली ट्रांसमिशन कॉरिडोर, ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट और कंप्यूटिंग सुविधाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। विश्वसनीय डेटा, जवाबदेह संस्थान और प्रभावी शासन व्यवस्था भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने देश निर्माण के लिए चार जरूरी आधार बताए—दीर्घकालिक निवेश, जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी शासन और सक्षम स्थानीय नेतृत्व।
धारावी पुनर्विकास परियोजना का भी किया जिक्र
माइकल ब्लूमबर्ग के साथ बैठक में शहरी विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत विनिर्माण और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
इस दौरान गौतम अदाणी ने मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी सफलता का आकलन केवल विकसित की गई रियल एस्टेट के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसके बजाय यह देखा जाना चाहिए कि परियोजना से स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर और आजीविका में कितना सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि यदि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ समुदाय का भरोसा कायम रखा जाए और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों की रक्षा की जाए, तो यह परियोजना शहरी पुनर्विकास के लिए एक उदाहरण बन सकती है।
लोगों की जिंदगी में बदलाव से मापा जाए विकास
गौतम अदाणी ने कहा कि बुनियादी ढांचे की असली सफलता केवल बनाई गई संपत्तियों से नहीं, बल्कि उन अवसरों से तय होनी चाहिए, जिन्हें लोग उनकी मदद से हासिल कर पाते हैं।
पोस्ट के मुताबिक, माइकल ब्लूमबर्ग ने मंगलवार को दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित किया था। उन्होंने इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत विनिर्माण और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत की प्रगति पर बात की थी।









