भारत-फिनलैंड की ‘खास दोस्ती’ और मजबूत, विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनेन ने कहा- ‘FTA से भारत में बढ़ेगा निवेश और रोजगार’…

फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनेन ने इंडिया-यूरोपियन यूनियन FTA को भारत की आर्थिक प्रगति के लिए आधार बताया है। उन्होंने ट्रेड, ग्रीन एनर्जी, AI और 6G जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ मजबूत सहयोग की उम्मीद जताई है।

भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंध अब एक नए मुकाम पर पहुंच गए हैं। फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनेन ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में भारत के साथ अपनी ‘खास दोस्ती’ का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले कभी इतने अच्छे नहीं रहे। उन्होंने इंडिया-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार बताया।

FTA: निवेश और रोजगार का नया जरिया

वाल्टोनेन ने जोर देकर कहा कि जनवरी 2026 में हुए FTA समझौते के बाद से निवेश और व्यापार में अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। दिसंबर 2026 में होने वाली औपचारिक साइनिंग के बाद, टेक्सटाइल, लेदर, ऑटोमोबाइल्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों में टैरिफ खत्म होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि फिनलैंड इस एग्रीमेंट को जल्द से जल्द लागू करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएगा क्योंकि यह न केवल ट्रेड बढ़ाएगा, बल्कि दोनों देशों के लोगों के लिए नौकरियों के अवसर और खुशहाली लाएगा।

ग्रीन ट्रांज़िशन और टेक्नोलॉजी में सहयोग

फिनलैंड, जो 2035 तक कार्बन-न्यूट्रल बनने का लक्ष्य रखता है, ने भारत की ‘क्लाइमेट न्यूट्रैलिटी’ यात्रा में पूर्ण सहयोग देने की बात कही है। वाल्टोनेन ने कहा, “क्लीन एनर्जी न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि यह एक बेहतरीन बिज़नेस केस भी है।” इसके अलावा, विदेश मंत्री एस जयशंकर के हालिया फिनलैंड दौरे के संदर्भ में उन्होंने बताया कि दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, 6G टेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और स्पेस जैसे भविष्य के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की नींव रख चुके हैं।

लोकतांत्रिक मूल्यों की साझेदारी

फिनिश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और फिनलैंड जैसे लोकतांत्रिक देश जो व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता को महत्व देते हैं, उन्हें वैश्विक स्तर पर और अधिक करीब आना चाहिए। दोनों देशों का ‘कॉमन एजेंडा’ अब ट्रेड से आगे निकलकर सुरक्षा और उभरती टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में और भी गहरा हो रहा है। यह पार्टनरशिप न केवल आर्थिक विकास का जरिया है, बल्कि भविष्य के वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत गठबंधन भी है।

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