
सॉफ्ट-पावर डिप्लोमेसी, कैपेसिटी बिल्डिंग और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने की अपनी रणनीतिक प्रतिबद्धता के तहत भारत ने पिछले एक साल में बड़ा कदम उठाया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान यह जानकारी दी कि भारत ने पिछले साल लगभग 17,550 करोड़ रुपये के छह डेवलपमेंट लाइन्स ऑफ क्रेडिट (LoC) मंजूर किए हैं।
राज्यसभा में विकास साझेदारी पहलों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि ये रियायती क्रेडिट लाइन्स बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), कनेक्टिविटी, सोशल हाउसिंग, मोबिलिटी, स्वास्थ्य, कृषि और आवश्यक वस्तुओं की खरीद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ाई गई हैं। इंडियन डेवलपमेंट एंड इकोनॉमिक असिस्टेंस स्कीम (IDEAS) के तहत एक्जिम बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से दिए जाने वाले ये लोन, पार्टनर देशों को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में मदद करते हैं।
4,500 करोड़ रुपये की ग्रांट-बेस्ड मदद भी शामिल
रियायती लोन के अलावा, भारत ने इसी अवधि के दौरान लगभग 4,500 करोड़ रुपये के करीब 60 प्रोजेक्ट्स को ग्रांट-बेस्ड (अनुदान) मदद के रूप में भी मंजूरी दी है। ये प्रोजेक्ट्स शिक्षा, कृषि, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी, हेल्थकेयर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी से जुड़े हैं। इसके साथ ही, क्विक इंपैक्ट प्रोजेक्ट्स और मल्टीलेटरल फ्रेमवर्क के तहत भी कई सहायता राशि स्वीकृत की गई हैं।
प्रोजेक्ट्स की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए ‘नेत्रा’ पोर्टल
विदेशी वेंचर्स की निगरानी और समय पर प्रगति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डिजिटल मैकेनिज्म तैयार किया है। मंत्री ने जानकारी दी कि LoC प्रोजेक्ट्स के मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग के लिए साल 2022 से नया ई-ट्रैकिंग और रिमोट एडमिनिस्ट्रेशन (NETRA) पोर्टल शुरू किया गया है। इसके जरिए पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स का समय-समय पर इम्पैक्ट असेसमेंट भी किया जाता है।
भारत का यह डेवलपमेंट कोऑपरेशन मॉडल पूरी तरह से ‘डिमांड-ड्रिवन’ है, जो पार्टनर देशों की प्राथमिकताओं पर आधारित है। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी और ग्लोबल साउथ आउटरीच के तहत यह कदम एशिया और अफ्रीका के देशों के साथ भारत के सामरिक और आर्थिक रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बना रहा है।









