भारत की GDP वृद्धि Q3 में 6.3% तक पहुंचने की संभावना : सर्वे

भारत की अर्थव्यवस्था पिछले तिमाही में 6.3% की दर से बढ़ने की संभावना है, जो सरकारी खर्चों में वृद्धि के कारण संभव हुआ।

भारत की अर्थव्यवस्था पिछले तिमाही में 6.3% की दर से बढ़ने की संभावना है, जो सरकारी खर्चों में वृद्धि के कारण संभव हुआ। हालांकि, घरेलू मांग कमजोर बनी हुई है। अप्रैल-जून 2024 में हुए आम चुनावों के कारण सरकार को बुनियादी ढांचा खर्च में कटौती करनी पड़ी थी, जिससे जुलाई-सितंबर तिमाही में विकास दर घटकर 5.4% रह गई थी।

हालांकि, 2024 की अंतिम तिमाही में सरकारी व्यय में दो अंकों की वृद्धि हुई, जिससे आर्थिक वृद्धि में सुधार आया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से नीतिगत समर्थन पर आधारित है, न कि व्यापक आर्थिक मजबूती पर। आमतौर पर त्योहारों के मौसम में उपभोक्ता खर्च बढ़ता है, लेकिन इस बार यह अपेक्षाकृत धीमा रहा।

28 फरवरी को जारी होंगे आधिकारिक आंकड़े

रॉयटर्स द्वारा 17-24 फरवरी के बीच किए गए 53 अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में GDP वृद्धि 6.3% रहने की उम्मीद है, जो पिछली तिमाही के 5.4% के निचले स्तर से अधिक है। पूर्वानुमान 5.8% से 7.4% के बीच रहे, जबकि ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) 6.2% बढ़ने का अनुमान है।

ANZ के अर्थशास्त्री धीरज निम ने कहा, “सरकारी खर्च में वृद्धि ही मुख्य कारण है, लेकिन खपत अभी भी मजबूत वृद्धि कारक नहीं बनी है। आय असमानता बढ़ रही है, जिससे उपभोक्ता मांग प्रभावित हो रही है।” विश्व असमानता लैब के अनुसार, भारत के शीर्ष 1% सबसे अमीर लोगों के पास पिछले छह दशकों में सबसे अधिक संपत्ति है।

8% की वृद्धि के लिए जरूरी हैं बड़े सुधार

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत को फिर से 8% या उससे अधिक की वृद्धि दर हासिल करने के लिए कृषि और श्रम बाजारों में बड़े सुधारों की जरूरत है, लेकिन मौजूदा समय में ऐसे सुधार होते नहीं दिख रहे। सर्वेक्षण के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तक GDP वृद्धि 6.3% से 6.7% के बीच रहने की संभावना है, जो रोजगार सृजन और व्यापक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक 8% की दर से कम है।

STCI प्राइमरी डीलर के मुख्य अर्थशास्त्री आदित्य व्यास ने कहा कि सरकार द्वारा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई, क्योंकि कंपनियों को मांग में बढ़ोतरी को लेकर अब भी संदेह है। उन्होंने कहा, “जब तक इन चुनौतियों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक पिछली तिमाहियों जैसी तेज वृद्धि नहीं देखी जाएगी। साथ ही, सिर्फ वृद्धि दर पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि इसे क्या चला रहा है और कितने रोजगार सृजित हो रहे हैं।”

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