लद्दाख के उप राज्यपाल ने लेह में 800 एकड़ बंजर भूमि को सुधारने का मेगा प्रोजेक्ट किया शुरू, पढ़े पूरी खब़र…

लद्दाख के एलजी विनय कुमार सक्सेना ने लेह के स्पितुक में 800 एकड़ बंजर जमीन को सुधारने का प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। साथ ही पुगा घाटी में जियोथर्मल प्रोजेक्ट के लिए MoU को 5 साल बढ़ाया गया है।

लेह: लद्दाख के पर्यावरण और कृषि परिदृश्य को बदलने की दिशा में प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। लद्दाख के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को लेह के स्पितुक गांव में लगभग 800 एकड़ बंजर और खराब हो चुकी भूमि को पुनर्जीवित करने के लिए एक विशाल पारिस्थितिक सुधार अभियान (इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन ड्राइव) की शुरुआत की है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत सदियों से सूखी और बंजर पड़ी जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए बेहद सरल, प्रभावी और किफायती ‘मीठे पानी की इंजीनियरिंग’ (फ्रेशवॉटर इंजीनियरिंग) का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए हाल ही में पुनर्निर्मित की गई ‘इगू-फे नहर’ के अतिरिक्त पानी को आधुनिक मशीनों के जरिए इस बंजर इलाके की ओर मोड़ा जा रहा है।

मीठे पानी की इंजीनियरिंग से बदलेगा स्पितुक का भूगोल

परियोजना की जानकारी देते हुए उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:

“लद्दाख में एक बड़े पारिस्थितिक और बंजर भूमि सुधार अभियान के शुभारंभ की घोषणा करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इस पहल का उद्देश्य लेह के स्पितुक गांव की लगभग 800 एकड़ बंजर भूमि का कायाकल्प करना है। इगू-फे नहर से छोड़े जाने वाले मीठे पानी से अंततः यहां की सूखी मिट्टी हाइड्रेट होगी और जमीन में मौजूद हानिकारक व जहरीले लवण (नमक) बाहर निकल जाएंगे। इससे स्थानीय वनस्पतियों को उगने में मदद मिलेगी और यह बंजर क्षेत्र एक नमी सोखने वाले जीवंत इकोसिस्टम में बदल जाएगा।”

प्रशासन को उम्मीद है कि ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ की शानदार सफलता को आगे बढ़ाने वाला यह नया प्रोजेक्ट पूरे क्षेत्र में भूजल (ग्राउंडवॉटर) को रिचार्ज करने, मिट्टी के कटाव को रोकने और टिकाऊ कृषि गतिविधियों के लिए उपजाऊ भूमि का दायरा बढ़ाने में एक आदर्श मॉडल साबित होगा। गौरतलब है कि इगू-फे नहर के पूरी तरह चालू होने से अब इलाके की 4,300 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई की जा रही है।

पुगा घाटी में जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए MoU 5 साल बढ़ा

इस कृषि सुधार के साथ-साथ लद्दाख हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) के क्षेत्र में भी एक बड़े आत्मनिर्भर बदलाव की ओर बढ़ रहा है। उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख की पुगा घाटी में 14,000 फीट से अधिक की रिकॉर्ड ऊंचाई पर भारत का पहला भू-तापीय ऊर्जा प्रोजेक्ट (जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट) स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसले को मंजूरी दी है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, उप राज्यपाल ने भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम (PSU) ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) के साथ हुए त्रिपक्षीय समझौते (MoU) को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। इससे पहले 6 फरवरी 2021 को हस्ताक्षरित किया गया पिछला समझौता 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया था। लद्दाख के अत्यधिक विषम और चुनौतीपूर्ण मौसम के कारण परियोजना का कुछ काम अधूरा रह गया था, जिसे पूरा करने के लिए ओएनजीसी की मांग पर उप राज्यपाल ने इस विस्तार को हरी झंडी दिखाई है।

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