नेपाल बॉर्डर जाने वाले सावधान,रात 10 से सुबह 6 बजे तक बॉर्डर रहेगा बंद,जानें पूरी गाइडलाइन

मधवापुर (मधुबनी): भारत-नेपाल सीमा पर स्थित मधवापुर बॉर्डर के कई रास्तों पर एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) द्वारा बैरिकेडिंग किए जाने से उपजा विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार की देर शाम शुरू हुए इस तनाव को शांत करने के लिए शुक्रवार की शाम मधवापुर एसएसबी कैंप में अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच एक अहम वार्ता बैठक बुलाई गई। करीब ढाई घंटे तक चली इस लंबी मैराथन बैठक के बाद भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता पूरी तरह बेनतीजा (निष्कर्षहीन) रही।

रास्तों पर बैरिकेडिंग लगाने से शुरू हुआ विवाद
मामला गुरुवार की देर शाम का है, जब एसएसबी ने सुरक्षा और तस्करी पर रोक लगाने के उद्देश्य से बॉर्डर को जोड़ने वाले कई मुख्य व स्थानीय रास्तों पर अचानक बैरिकेडिंग लगा दी। बॉर्डर के रास्तों को इस तरह बंद किए जाने से स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इन रास्तों के बंद होने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होगी।

बैठक में जुटे प्रशासनिक और पुलिस महकमे के बड़े अफसर
विवाद की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को बुलाई गई इस बैठक में एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जिले के बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी:
एसएसबी 48वीं बटालियन: कमांडेंट राजेंद्र कुमार और डिप्टी कमांडेंट हरि नारायण जाट।

अनुमंडल प्रशासन (बेनीपट्टी): एसडीएम (SDM) सारंग पानी पांडेय और डीएसपी (DSP) अमित कुमार।

स्थानीय प्रशासन: बीडीओ (BDO) मनोज कुमार मुर्मू, सीओ (CO) सुनील कुमार और मधवापुर थानाध्यक्ष सन्नी कुमार मौसम।

ढाई घंटे की चर्चा के बाद भी क्यों नहीं निकला निष्कर्ष?
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों के सामने अपनी व्यावहारिक समस्याओं को रखा, जबकि एसएसबी के अधिकारियों ने सीमा सुरक्षा, नियमों और कानून व्यवस्था का हवाला दिया। प्रशासनिक अधिकारियों (एसडीएम और डीएसपी) ने दोनों पक्षों के बीच बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की, लेकिन ढाई घंटे की बहस और चर्चा के बाद भी कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई।

फिलहाल बॉर्डर पर तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, और मामले को सुलझाने के लिए आने वाले दिनों में दोबारा बातचीत की संभावना जताई जा रही है।

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