
पीलीभीत/बीसलपुर: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां बीसलपुर क्षेत्र के अमृता खास गांव स्थित ‘श्री बालक राम सरस्वती शिशु मंदिर’ की दीवार अचानक ढह गई। इस हादसे में करीब एक दर्जन बच्चे और दो शिक्षक मलबे के नीचे दब गए। दीवार गिरते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी, चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में मलबे को हटाकर मासूम बच्चों को बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जिनमें से कई बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
टीनशेड के सहारे चल रहा था स्कूल, सुरक्षा मानकों की उड़ीं धज्जियां
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, यह स्कूल लंबे समय से महज टीनशेड और कच्ची-पक्की दीवारों के सहारे संचालित किया जा रहा था। सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर सैकड़ों बच्चों को इस खतरनाक ढांचे के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। इस हादसे ने निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मान्यता कक्षा 5 तक, धड़ल्ले से चल रही थीं कक्षा 8 तक की क्लास
हादसे के बाद जो सच सामने आ रहा है, वह बेहद चौंकाने वाला है। बताया जा रहा है कि स्कूल के पास केवल कक्षा 1 से 5 तक की ही मान्यता थी, लेकिन नियमों को ठेंगा दिखाते हुए यहां कक्षा 8 तक के बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही थी। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि शिक्षा विभाग की नाक के नीचे बिना मान्यता के अतिरिक्त कक्षाएं कैसे चलाई जा रही थीं? क्या विभाग के पास इसकी कोई जानकारी नहीं थी या जानबूझकर आंखें मूंद ली गई थीं?
सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग, फोन काटकर भागीं BSA
इस हादसे ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और नियमित निरीक्षण के दावों की हवा निकाल दी है। प्रदेश सरकार के सख्त आदेशों के बावजूद अफसरों की लापरवाही के कारण बच्चों की जान जोखिम में डाली जा रही है। हादसे के बाद जब बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रोशनी सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। अफसरों का यह रवैया दिखाता है कि वे अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। फिलहाल, मामले में जांच के आदेश की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल वही है कि मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
रिपोर्ट : हरिपाल सिंह









