
मुरादाबाद: माया नगर सहकारी आवास समिति की अंतरिम प्रबंध समिति की जांच रिपोर्ट में फ्लैट आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विनायक अपार्टमेंट के एक टावर में कुल 28 फ्लैट हैं, जिनमें से करीब आधे यानी 12 फ्लैट एक ही परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर अपने करीबी लोगों और परिवारों को लाभ पहुंचाया, जबकि लंबे समय से भूखंड और फ्लैट का इंतजार कर रहे वास्तविक सदस्य अपने अधिकार से वंचित रह गए।
बिज परिवार के नाम 12 फ्लैट आवंटित होने का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि विनायक अपार्टमेंट में सबसे अधिक लाभ बिज परिवार को मिला। टावर-बी में सुकेश कुमार बिज, सुनीता बिज, इशु बिज, भोला नाथ बिज, आशा बिज, अशोक कुमार बिज, श्वेता बिज, अनिल कुमार बिज, विमल बिज, अनुभव बिज, विनोद कुमार बिज और सुदमन कुमार के नाम 12 फ्लैट दर्ज हैं। इसके अलावा मल्होत्रा परिवार के केवल कृष्ण मल्होत्रा, अजला मल्होत्रा और मेघा मल्होत्रा के नाम तीन फ्लैट आवंटित होने का उल्लेख किया गया है।
पूर्व पदाधिकारियों पर भी उठे सवाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन सभापति पूर्व विधायक फूलकुंवर को स्वयं एक फ्लैट और उनके बेटे कुंवर मयंक सिंह को एक अन्य फ्लैट आवंटित किया गया। वहीं तत्कालीन सचिव अजय कुमार दुबे और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी तीन फ्लैट आवंटित होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में महेंद्रपाल सिंह राठी परिवार, अग्रवाल परिवार समेत कई अन्य लोगों को एक से अधिक फ्लैट मिलने का दावा किया गया है।
सदस्यता हस्तांतरण में अनियमितता का आरोप
अंतरिम प्रबंध समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई सदस्यताओं के हस्तांतरण में नियमों का पालन नहीं किया गया। न तो प्रबंध समिति का कोई वैध प्रस्ताव मिला और न ही नियमानुसार हस्तांतरण शुल्क जमा कराने का रिकॉर्ड उपलब्ध है।
रिपोर्ट में समिति के दस्तावेजों में वाइटनर, कटिंग और कूटरचित अभिलेखों के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। कई मामलों में मूल सदस्यों की जानकारी के बिना सदस्यता दूसरे लोगों के नाम ट्रांसफर करने की बात कही गई है।
जमीन एक्सचेंज और रिकॉर्ड में गड़बड़ी का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, समिति की बहुमूल्य जमीन को वर्षों बाद कम कीमत वाली जमीन से एक्सचेंज कर दिया गया। इस प्रक्रिया के लिए भी कोई वैध प्रस्ताव उपलब्ध नहीं मिला। वहीं लाकड़ी फाजलपुर योजना में 678 सदस्यों में से अधिकांश की मूल फाइलें उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। जांच में केवल 16 सदस्यों की अधूरी पत्रावलियां मिलीं।
बैंक खातों के संचालन पर भी सवाल
जांच रिपोर्ट में समिति के बैंक खातों के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि खाते बिल्डर के साथ संयुक्त हस्ताक्षरों से संचालित किए गए और कई अभिलेखों पर विधिवत हस्ताक्षर नहीं मिले। अंतरिम प्रबंध समिति ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा-65 के तहत विस्तृत जांच कराने, अवैध सदस्यताओं का सत्यापन, जमीन का चिन्हांकन, अवैध कब्जे हटाने और दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।









