राम मंदिर के भोग को नहीं मिला FSSAI प्रमाणपत्र, आवेदन के बाद भी प्रक्रिया अटकी

अयोध्या: भव्य राम मंदिर में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के ढाई वर्ष बाद भी मंदिर के भोग को शुद्धता का प्रमाणपत्र नहीं मिल पाया है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से किए गए आवेदन के बाद एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) की टीम ने सीता रसोई का निरीक्षण भी किया था, लेकिन अब तक प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सका है।

दो माह पहले ट्रस्ट के आवेदन के बाद एफएसएसएआई की पांच सदस्यीय टीम ने 27 और 28 मई को राम मंदिर परिसर स्थित सीता रसोई का गहन परीक्षण किया था। टीम ने भोग में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता और अन्य मानकों की जांच की थी। साथ ही भोग तैयार करने वाले रसोइयों और कोठारियों को फास्ट हाइजेनिक प्रशिक्षण भी दिया गया था।

इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जल्द ही प्रमाणपत्र जारी होने की बात कही गई थी, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

बताया जा रहा है कि जून महीने में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद प्रमाणपत्र की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। ट्रस्ट की ओर से आगे पैरवी नहीं किए जाने के कारण मामला अब भी लंबित बताया जा रहा है। वहीं, प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले पूर्व महासचिव चंपतराय अब ट्रस्ट पदाधिकारी नहीं हैं।

राम मंदिर परिसर में निर्माण कार्य जारी रहने और सीता रसोई के स्थायी नहीं होने के कारण पहले ट्रस्ट ने एफएसएसएआई प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नहीं किया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सीता रसोई को मां अन्नपूर्णा मंदिर के पास स्थायी स्थान मिलने पर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया था।

खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त ग्रेड-दो देवाशीष उपाध्याय ने बताया कि राम मंदिर का भोग प्रमाणपत्र अभी प्रक्रियागत है। उन्होंने कहा कि यह उनके स्तर का मामला नहीं है और प्रमाणपत्र कब तक जारी होगा, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि नए सिरे से आवेदन करना होगा या नहीं।

अयोध्या के चार मंदिरों को मिल चुका है प्रमाणपत्र

एफएसएसएआई की ओर से दिया जाने वाला ‘BHOG (Blissful Hygienic Offering to God) Certificate’ मंदिरों में प्रसाद और भोग की शुद्धता व स्वच्छता का प्रमाण माना जाता है। अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर, कनक भवन मंदिर, जैन मंदिर रायगंज और गुरुद्वारा नजरबाग को यह प्रमाणपत्र पहले ही मिल चुका है।

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