
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने एक बड़ा और साहसिक बयान देकर ब्रिटिश राजशाही और भारत के बीच सदियों पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममदानी ने स्पष्ट किया कि अगर उनकी मुलाकात किंग चार्ल्स तृतीय से होती है, तो वे औपचारिक बातों के बजाय सीधे ‘कोहिनूर’ हीरे की वापसी की मांग करेंगे।
मेयर ममदानी ने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर मैं राजा से बात करूँगा… तो मैं उन्हें कोहिनूर हीरा वापस करने के लिए प्रोत्साहित करूँगा।”
ऐतिहासिक न्याय की मांग किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर न्यूयॉर्क के ‘वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ के दौरे पर हैं। इस कार्यक्रम में मेयर ममदानी भी शामिल होंगे। जहां आमतौर पर मेयर और ब्रिटिश राजशाही के बीच की मुलाकातें प्रोटोकॉल और कूटनीति तक सीमित रहती हैं, वहीं ममदानी के इस बयान ने इसे ‘ऐतिहासिक न्याय’ के मंच में बदल दिया है।
कोहिनूर: लूट या उपहार?
भारत की गोलकुंडा खदानों से निकला यह 105.6 कैरेट का हीरा सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। इतिहास गवाह है कि 1849 में एंग्लो-सिख युद्ध के बाद, ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 वर्षीय महाराजा दलीप सिंह को लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया था, जिसके तहत यह हीरा महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया।
भारत लंबे समय से इसे “लूट का खजाना” मानता आया है, जबकि ब्रिटिश सरकार इसे एक कानूनी संधि का हिस्सा बताती है। ममदानी के सुर में सुर मिलाते हुए करोड़ों भारतीय आज भी इसे औपनिवेशिक शोषण की एक याद मानते हैं जिसे वापस घर (भारत) आना चाहिए।









