शंघाई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने मनाई गांधी जयंती, महात्मा गांधी के पहले चीनी शिष्य शांति त्सेंग के परिवार को किया सम्मानित

शंघाई स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास (CGI शंघाई) ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के साथ महात्मा गांधी की जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस बेहद उत्साह के साथ मनाया। इस विशेष कार्यक्रम में विभिन्न देशों के कॉन्सुल जनरल, राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों और भारत के मित्रों ने हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने सत्य, अहिंसा, शांति और संवाद के गांधीवादी मूल्यों पर चर्चा की। इसके साथ ही, कार्यक्रम में देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनकी सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र सेवा को भी नमन किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए शंघाई में भारत के कॉन्सुल जनरल प्रतीक माथुर ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार सीमाओं से परे हैं और चीन के साथ उनके विशेष संबंध रहे हैं। उन्होंने भारत-चीन संबंधों में गांधीजी के संदेशों की प्रासंगिकता पर बात करते हुए 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात का जिक्र किया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महात्मा गांधी के पहले चीनी शिष्य शांति त्सेंग (त्सेंग शेंगती) के परिवार का सम्मान रहा। शांति त्सेंग 1925 में भारत आए थे और साबरमती आश्रम में एक साल से अधिक समय बिताया था। उन्होंने अपनी किताब के जरिए चीनी पाठकों को गांधीवादी विचारों से परिचित कराया था। कॉन्सुल जनरल ने उनके पोते को भारत-चीन के लोगों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने के उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।

कार्यक्रम के दौरान गांधीजी के प्रिय भजनों “रघुपति राघव राजाराम” और “वैष्णव जन तो” की लाइव प्रस्तुतियां दी गईं। इसके अलावा, दूतावास द्वारा आयोजित ‘हिंदी दिवस’ गतिविधियों के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। यह आयोजन ‘सेवा पखवाड़ा’, “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान और आयुर्वेद प्रचार जैसी पहलों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, जिसने गांधीजी के समाज सेवा, पर्यावरण और शांति के संदेश को जीवंत किया।

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