
लखनऊ: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर वर्तमान में लखनऊ में असिस्टेंट कमिश्नर कमर्शियल टैक्स (राज्य कर विभाग) के पद पर कार्यरत श्रद्धा पाण्डेय ने एक और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। श्रद्धा ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की एकीकृत 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में पूरे राज्य में प्रथम स्थान (रैंक-1) हासिल कर टॉप किया है। इस शानदार सफलता के बाद अब श्रद्धा पाण्डेय को बिहार में प्रतिष्ठित एसडीएम के पद पर तैनाती मिलेगी।
बिहार लोक सेवा आयोग ने शनिवार को 70वीं सीसीई का अंतिम परिणाम जारी किया, जिसमें कुल 2035 पदों के मुकाबले 2027 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। इस परीक्षा के टॉप-10 में जहां पांच पुरुष और पांच महिला उम्मीदवार शामिल हैं, वहीं 593 अंकों के साथ उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की निवासी श्रद्धा पाण्डेय सूची में सबसे शीर्ष पर रहीं।
कॉलेज के दिनों में ही बुना था अफसर बनने का ख्वाब
मूल रूप से प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र की रहने वाली श्रद्धा पाण्डेय के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा एक भाई और एक बहन हैं। उनके पिता लॉ ग्रेजुएट हैं और दवा का व्यवसाय करते हैं, जबकि माता कुशल गृहणी हैं। श्रद्धा ने अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन (UG & PG) की पढ़ाई प्रतापगढ़ से ही पूरी की थी। वर्ष 2021 में इतिहास और इंग्लिश लिटरेचर विषयों के साथ ग्रेजुएशन करने के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का दृढ़ संकल्प ले लिया था। इसके बाद वह तैयारी के लिए लखनऊ आ गईं।
श्रद्धा की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) 2024 की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। यूपी पीसीएस 2024 में ईडब्ल्यूएस (EWS) कैटेगरी से 153वीं रैंक हासिल कर वे असिस्टेंट कमिश्नर बनी थीं। इसके ठीक दो साल बाद, उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर 70वीं बिहार पीसीएस परीक्षा में पहली रैंक हासिल कर सीधे एसडीएम का पद प्राप्त किया है।
सफलता के लिए श्रद्धा पाण्डेय के ‘सक्सेस मंत्र’
अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय श्रद्धा पाण्डेय ने ‘स्वाध्याय’ (Self Study) और समाचार पत्रों के नियमित अध्ययन को दिया है। उन्होंने भविष्य में सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों को बेहद महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा, “रोजाना निरंतर 4 से 5 घंटे की केंद्रित पढ़ाई और देश-दुनिया की खबरों के लिए अखबार पढ़ना बेहद जरूरी है।” इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से बचने की सलाह देते हुए कहा कि प्रतियोगी छात्रों को पढ़ाई के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए।









