
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के योगी सरकार के कार्यप्रणाली को लेकर फटकार लगाई हैं. सुप्रीम कोर्ट का कहना हैं कि वह अदालत के आदेश की अवहेलना करते हुए आचार संहिता का हवाला देते हुए छूट याचिकाओं पर निर्णय ले रही है, जबकि अदालत ने आदेश दिया था कि छूट पर निर्णय लेने में आचार संहिता आड़े नहीं आएगी. अदालत ने पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के कारागार विभाग के प्रमुख सचिव को अदालती आदेशों का पालन न करने पर आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया था.
क्या हैं पूरा मामला
जस्टिस एस ओका और एजी मसीह की बेंच ने रविवार को सुनवाई के दौरान CM ऑफिस के अफसरों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा हैं की 14 अगस्त तक एफिडेविट के साथ ऐसे अफसरों के नाम बताए जो कार्य में लापरवाही कर रहे हैं.
वही आपको बता दे कि इस मामले में आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार के वकील के पास इतनी देरी के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं है. उन्होंने कहा कि इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद कि आचार संहिता छूट याचिका पर निर्णय लेने के रास्ते में नहीं आएगी, सीएम के सचिव को भेजी गई फाइल स्वीकार नहीं की गई. आचार संहिता खत्म होने के बाद ही फाइल सीएम सचिवालय को भेजी गई. हम पीएस को निर्देश देते हैं कि वे हलफनामा दाखिल करके उन अधिकारियों के नाम बताएं जिन्होंने फाइलें लेने से इनकार कर दिया.









