तिरंगा रोप लाइट बनी पोस्टर की दुकान… लाखों की लाइट पर अवैध होर्डिंग का कब्जा…

पीलीभीत के बरखेड़ा नगर पंचायत में लाखों की लागत से लगी तिरंगा रोप लाइट पर अवैध पोस्टर और होर्डिंग का कब्जा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ईओ और चेयरमैन पर उठे सवाल।

पीलीभीत: बरखेड़ा नगर पंचायत में लाखों रुपये की लागत से कस्बे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाई गई तिरंगा रोप लाइट अब पोस्टर और होर्डिंग से ढकती नजर आ रही है। नगर की सुंदरता बढ़ाने वाली लाइट के पोलों पर खुलेआम प्रचार सामग्री चस्पा किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

सरकारी लाइट या प्रचार का पोल?

कस्बे में जगह-जगह तिरंगा रोप लाइट के पोल पोस्टर और होर्डिंग से पटे नजर आ रहे हैं। नियम-कायदों को ताक पर रखकर नगर पंचायत की संपत्ति का इस्तेमाल प्रचार के लिए किया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर पोस्टर लगाने की अनुमति नहीं है तो आखिर इन पोस्टरों को हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

किलोमीटर तक तिरंगा रोप लाइट के पोलों पर पोस्टर ही पोस्टर

वायरल वीडियो में बरखेड़ा कस्बे में कई किलोमीटर तक लाइट के पोलों पर पोस्टर लगे दिखाई दे रहे हैं। जिस व्यवस्था पर नगर पंचायत ने लाखों रुपये खर्च किए, उसी व्यवस्था को प्रचार सामग्री से ढक दिया गया है। इससे न केवल कस्बे की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि नगर पंचायत की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ईओ और चेयरमैन की भूमिका पर उठे सवाल

मामले में प्रभारी ईओ और चेयरमैन के संरक्षण में अवैध पोस्टर-होर्डिंग लगाए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि नगर पंचायत प्रशासन को इतने बड़े स्तर पर लगाए गए पोस्टर दिखाई नहीं दिए या फिर कार्रवाई जानबूझकर टाली गई?

लाखों की लाइट, लेकिन जिम्मेदारी गायब?

सरकारी धन से लगाई गई तिरंगा रोप लाइट का उद्देश्य कस्बे की सुंदरता बढ़ाना था, लेकिन पोस्टरों ने पूरी व्यवस्था की तस्वीर ही बदल दी। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि नगर पंचायत की संपत्ति पर किसके इशारे पर पोस्टर लगाए गए और इन्हें हटाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

अब कार्रवाई का इंतजार

वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। अब देखना यह है कि नगर पंचायत प्रशासन अवैध होर्डिंग-पोस्टरों को हटाने के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करता है या फिर लाखों की लागत से लगी सरकारी लाइटें इसी तरह प्रचार का माध्यम बनी रहेंगी।

रिपोर्ट- हरिपाल सिंह

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