
देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने एक बेहद मानवीय और अहम फैसला सुनाते हुए हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए 105 साल के एक बुजुर्ग को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनकी उम्रकैद की बाकी बची सजा को पूरी तरह माफ कर दिया है और उनका केस हमेशा के लिए बंद कर दिया है। इस फैसले के बाद अब वह बिना किसी कानूनी बंदिश के एक स्वतंत्र जीवन जी सकेंगे।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही उनकी सजा की पूरी अवधि अभी समाप्त न हुई हो, लेकिन उन्हें अब दोबारा कभी जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने साल 2024 में दिए गए उनके अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण और अंतिम रूप दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में साल 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को साल 1994 में एक हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था, जिस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी। वह तभी से जेल में बंद थे। कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा उनकी अपील खारिज किए जाने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अपनी उम्र के 99वें साल में उन्होंने अपनी वृद्धावस्था और बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की याचिका दाखिल की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2024 में उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाते हुए उनकी सजा को पूरी तरह माफ कर दिया है।









