
नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट 2024–25 के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था FY26 में भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनी रह सकती है। रिपोर्ट में खपत में सुधार, सरकारी पूंजीगत व्यय में निरंतर बढ़ोतरी और मजबूत वित्तीय ढांचा जैसे कारकों को प्रमुख आधार बताया गया है।
विकास को समर्थन देने वाले प्रमुख कारक:
- ✅ बैंकों और कॉरपोरेट्स की स्वस्थ बैलेंस शीट
- ✅ वित्तीय स्थितियों में सहजता
- ✅ सेवाओं के क्षेत्र की मजबूती
- ✅ उपभोक्ताओं और व्यवसायों का आत्मविश्वास
- ✅ मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फ़ंडामेंटल्स
जोखिम कारक भी मौजूद:
- 🌍 वैश्विक व्यापार में संरक्षणवाद (Protectionism)
- 🕊️ लम्बे समय से चल रहे भू-राजनीतिक तनाव
- 💹 अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता
- 🔺 महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव (Upside Risk to Inflation)
FY26 में वृद्धि और महंगाई पर RBI का दृष्टिकोण:
- 📊 FY25 की पहली छमाही की तुलना में FY26 में गतिविधियों में तेजी आने की संभावना
- 🥦 रबी फसल में सुधार से खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी
- 💸 हेडलाइन महंगाई में धीरे-धीरे लक्ष्य की ओर वापसी की उम्मीद
- 📉 मौद्रिक नीति (Monetary Policy) रहेगी विकासोन्मुख, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों पर सतर्क निगरानी जारी रहेगी
विदेशी पूंजी और बाह्य स्थिरता:
- 🌐 पोर्टफोलियो पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव जारी
- ✅ भारत के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और कम बाहरी कर्ज, जिससे बाह्य क्षेत्र स्थिर बना हुआ है
RBI की आगामी नियामकीय (Regulatory) प्राथमिकताएं:
- 🔄 विभिन्न वित्तीय संस्थानों के लिए नियमों का सरल और समरूप करना
- 🌱 बैंकों के लिए जलवायु जोखिम पर प्रूडेंशियल गाइडलाइंस जारी करना
- 🤖 AI के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना
- 💻 साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकथाम प्रणाली को सुदृढ़ करना
- 📊 UCBs और NBFCs के लिए जोखिम-आधारित सुपरविजन को लागू करने की दिशा में कदम
RBI की रिपोर्ट बताती है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादों पर टिकी है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं और उत्पादन लागत बढ़ने जैसे जोखिमों से सावधान रहना होगा। मौद्रिक नीति को संतुलित रूप से विकास का समर्थन करना होगा, जबकि नियामकीय सुधार और AI व जलवायु नीति जैसे क्षेत्र में सतर्कता जरूरी होगी।









