
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सबसे हाई-प्रोफाइल विभागों में शुमार ‘औद्योगिक विकास विभाग’ में तबादला सत्र शुरू होते ही एक बड़ा प्रशासनिक और सियासी तूफान खड़ा हो गया है। विभाग के तहत आने वाले नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण और यूपीसीडा में बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों के बाद अब अचानक 17 अधिकारियों के ट्रांसफर निरस्त कर दिए गए हैं। नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, यमुना प्राधिकरण और यूपीसीडा में हुए तबादलों के बाद अब 17 अधिकारियों के ट्रांसफर निरस्त किए जाने से पूरे विभाग में हलचल तेज हो गई है। जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
24 घंटे के भीतर बदले फैसले, उठे सवाल
प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक दिन पहले बड़ी तैयारी के साथ तबादला सूची जारी होती है और अगले ही दिन इतनी बड़ी संख्या में अफसरों के ट्रांसफर रोक दिए जाते हैं? चर्चा है कि दिल्ली-एनसीआर (NCR) की प्राइम पोस्टिंग और अहम कुर्सियों पर काबिज रहने के लिए अधिकारियों के बीच भारी खींचतान चल रही थी। विभागीय सूत्रों और विपक्ष का आरोप है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि “मलाईदार पोस्टिंग” को लेकर पर्दे के पीछे चल रहा एक बड़ा खेल है। क्या यह सामान्य प्रशासनिक सुधार है या मलाईदार पोस्टिंग को लेकर भीतर बड़ा खेल चल रहा है?, विपक्ष और विभागीय सूत्र इसे “मलाईदार पोस्टिंग” का खेल बता रहे हैं।
ताकतवर लॉबी और रसूखदारों को बचाने के आरोप
इस पूरे प्रकरण में यह गंभीर आरोप भी लग रहे हैं कि कुछ बेहद प्रभावशाली और रसूखदार अधिकारियों को अपनी कुर्सियों से हटने से बचाने के लिए अंतिम समय पर नीतिगत फैसलों में बदलाव किया गया। खासकर यूपीसीडा की एनसीआर पोस्टिंग, गाजियाबाद क्षेत्र और तीनों बड़े प्राधिकरणों की मलाईदार सीटों को लेकर उंगलियां उठ रही हैं। गौरतलब है कि पिछले साल भी इसी विभाग में तबादलों को लेकर भारी विवाद हुआ था। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस पूरे मामले पर दखल देकर इसकी उच्च स्तरीय समीक्षा कराएगी या ताकतवर लॉबी का यह दबदबा यूं ही बरकरार रहेगा।









