दुनिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर, ‘बड़ी ताकतों के सौदे’ का दौर खत्म…एस. जयशंकर का बड़ा बयान

फिर भी उसने ग्लोबल साउथ के देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई। इससे यह साबित होता है कि ग्लोबल साउथ की भावना वास्तविक है और इसमें एक तरह की सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव भी है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रायसीना डायलॉग 2026 में वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ चुकी है और बड़ी शक्तियों के बीच होने वाले बड़े समझौतों का दौर समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा है और कई देश मिलकर वैश्विक व्यवस्था को आकार दे रहे हैं।

जयशंकर ने कहा कि “ग्लोबल साउथ” केवल एक राजनीतिक शब्द नहीं है बल्कि यह साझा ऐतिहासिक अनुभवों और भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भारत खुद वैक्सीनेशन अभियान चला रहा था, फिर भी उसने ग्लोबल साउथ के देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई। इससे यह साबित होता है कि ग्लोबल साउथ की भावना वास्तविक है और इसमें एक तरह की सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव भी है।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि पहले “ग्लोबल वेस्ट” एक मजबूत और एकजुट समूह के रूप में देखा जाता था, जो सांस्कृतिक, राजनीतिक और रणनीतिक रूप से एकजुट था। लेकिन अब पश्चिमी देशों के भीतर भी मतभेद और अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाई देने लगे हैं।

जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की संरचना तेजी से बदल रही है और अब कुछ चुनिंदा शक्तियां पूरी दुनिया को नियंत्रित नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि बहुध्रुवीयता (Multipolarity) अब स्थायी वास्तविकता बन चुकी है और इसे रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में बड़े देश सीमित मुद्दों पर अस्थायी समझौते कर सकते हैं, लेकिन ऐसा कोई बड़ा वैश्विक समझौता नहीं होगा जिसमें कुछ शक्तियां मिलकर बाकी दुनिया पर अपनी शर्तें थोपें। उनके मुताबिक वह दौर अब खत्म हो चुका है।

जयशंकर ने बहुपक्षीय सहयोग (Multilateralism) पर भी जोर दिया और कहा कि बहुध्रुवीय दुनिया में भी बहुपक्षीय व्यवस्था संभव है। उन्होंने कहा कि बहुध्रुवीयता और बहुपक्षीयता एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं। बल्कि वैश्विक सहयोग की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दुनिया इस नई शक्ति संरचना को स्वीकार करे और उसी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाए।

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