
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री फैलाव में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने इस मार्ग पर जहाजों के लिए एक तरह का ‘टोल सिस्टम’ लागू कर दिया है।
लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की IRGC ने जहाजों के लिए एक नियंत्रित कॉरिडोर तय किया है, जिसमें जहाजों को पूरा दस्तावेज देना, क्लियरेंस कोड लेना और सुरक्षा एस्कॉर्ट के साथ गुजरना जरूरी बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 मार्च के बाद से कई जहाज इसी सिस्टम के तहत गुजर रहे हैं।
हालांकि भारत ने इन रियायतों को फायदों से खारिज कर दिया है। भारत के शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग है, जहां किसी भी तरह का टोल या शुल्क लगाना संभव नहीं है। उन्होंने इसे “पूरी तरह बेबुनियाद” बताया।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि भारत सहित मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है। इसमें चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ओर आने वाले कम से कम पांच जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुके हैं। इनमें ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ जैसे जहाज शामिल हैं, जो जल्द ही अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।
ईरान ने यह भी कहा है कि केवल “गैर-शत्रुतापूर्ण” जहाजों को ही इस मार्ग से पहुंचने की अनुमति दी जाएगी और इसके लिए पहले से समन्वय जरूरी होगा।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि होर्मुज मार्ग में बाधा आने से तेल, गैस और खाद की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, जिसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है।
ऐसे में एक तरफ ईरान के नियंत्रण की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी तरफ भारत और अंतरराष्ट्रीय नियम इस दावे को खारिज कर रहे हैं। अगर यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।









