
नोएडा की फैक्ट्रियों में मजदूरों के उग्र प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने श्रमिकों के हित में बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्य में न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) में अंतरिम वृद्धि की घोषणा कर दी है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इसके साथ ही, 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आगामी मई माह में एक नया ‘वेज बोर्ड’ गठित करने का भी निर्णय लिया गया है, जो मजदूरी की दरों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्धारण करेगा।
नोएडा और गाजियाबाद में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर जारी नई दरों में नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र के श्रमिकों को बड़ी राहत मिली है। इस क्षेत्र में मजदूरी में लगभग 21% का इजाफा किया गया है।
नई मासिक दरें (महंगाई भत्ते सहित):
- अकुशल मजदूर: ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690
- अर्धकुशल मजदूर: ₹12,445 से बढ़ाकर ₹15,059
- कुशल मजदूर: ₹13,940 से बढ़ाकर ₹16,868
नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में अकुशल मजदूरों को ₹13,006, अर्धकुशल को ₹14,306 और कुशल मजदूरों को ₹16,025 मिलेंगे। वहीं, राज्य के शेष जिलों के लिए यह दरें क्रमशः ₹12,356, ₹13,591 और ₹15,224 तय की गई हैं।
12 साल बाद वेज बोर्ड का गठन
श्रम एवं रोजगार मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि सामान्यतः हर पांच साल में वेज बोर्ड का गठन होना चाहिए, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह 12 साल बाद होने जा रहा है। मई 2026 में गठित होने वाला यह नया बोर्ड केंद्र सरकार के ‘फ्लोर वेज’ के अनुरूप आधारभूत दरों को तय करेगा। खास बात यह है कि अब आधारभूत मजदूरी और महंगाई भत्ते (DA) को अलग-अलग रखा जाएगा, जिससे गणना में पारदर्शिता आएगी।
अफवाहों पर न दें ध्यान: सरकार की अपील
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर 20,000 रुपये न्यूनतम मजदूरी की जो खबरें चल रही हैं, वे पूरी तरह निराधार और अफवाह हैं। अंतिम दरें वेज बोर्ड की सिफारिशों के बाद ही तय होंगी। श्रम मंत्री ने मजदूरों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कानपुर का उदाहरण देते हुए सचेत किया कि अशांति के कारण पूर्व में कई उद्योग बंद हो चुके हैं, जिससे अंततः मजदूरों का ही नुकसान होता है।
नियोक्ताओं को सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों और नियोक्ताओं से भी अपील की है कि वे श्रमिकों के हितों का पूरा ध्यान रखें। उन्होंने समय पर वेतन भुगतान, ओवरटाइम का उचित मुआवजा, साप्ताहिक छुट्टी, बोनस और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कार्यस्थलों पर महिला कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है।









