बिहार में ‘सम्राट’ युग की शुरुआत: आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे सम्राट चौधरी, मदरसे से सत्ता के शिखर तक का दिलचस्प सफर

बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भाजपा विधायक दल और उसके बाद एनडीए (NDA) विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी अब राज्य की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। आज सुबह 10:50 बजे राज्यपाल सैयद अता हसनैन राजभवन में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

नई सरकार का स्वरूप

सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनने वाली इस नई सरकार में सत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए जेडीयू कोटे से दो वरिष्ठ नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। अनुभवी नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार में एनडीए की नई सरकार का औपचारिक गठन हो जाएगा।

पैतृक गांव लखनपुर में जश्न का माहौल

सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा के साथ ही मुंगेर जिले के तारापुर स्थित उनके पैतृक गांव लखनपुर में दीपावली जैसा माहौल है। गांव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई अपने “मिट्टी के लाल” की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित है। ग्रामीणों का कहना है कि सम्राट आज भी जब गांव आते हैं, तो एक मुख्यमंत्री या बड़े नेता की तरह नहीं, बल्कि पुराने दोस्तों के साथ उसी आत्मीयता से मिलते हैं।

दिलचस्प कहानी: मदरसे से शुरू हुई थी शुरुआती शिक्षा

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके बचपन से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प और प्रेरक कहानी चर्चा में है। उनके बचपन के दोस्तों ने बताया कि लखनपुर गांव में उस दौर में शिक्षा का एकमात्र केंद्र वहां का मदरसा (अब उर्दू मध्य विद्यालय) हुआ करता था। सम्राट चौधरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई इसी मदरसे से की।

खास बात यह है कि उस समय वहां सांप्रदायिक सद्भाव का अद्भुत संगम था। सम्राट ने वहां हिंदी और संस्कृत के साथ-साथ उर्दू के कायदे (अलिफ, बे, ते) भी सीखे। उनके साथी याद करते हैं कि वे बचपन से ही बेहद कुशाग्र थे और पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट के भी जबरदस्त शौकीन थे।

राजनीतिक विरासत और लंबा संघर्ष

57 वर्षीय सम्राट चौधरी बिहार के कद्दावर नेता शकुनी चौधरी के पुत्र हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। उन्होंने आरजेडी और जेडीयू जैसे दलों में काम करने के बाद भाजपा में अपनी एक अलग पहचान बनाई। प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री जैसे पदों पर रहने के बाद अब वे सत्ता के शिखर पर पहुंचे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका मुख्यमंत्री बनना उनके संगठनात्मक कौशल और मजबूत सामाजिक पकड़ का परिणाम है।

जनता की सेवा ही प्राथमिकता : सम्राट चौधरी

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, यह पद एक बड़ी जिम्मेदारी है। हमारी सरकार पूरी निष्ठा के साथ बिहार को सुशासन, विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगी। लखनपुर की गलियों से निकलकर पटना के सत्ता के गलियारों तक का यह सफर न केवल सम्राट चौधरी की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह बिहार के एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले नेता की मेहनत और संघर्ष की भी कहानी है।

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