
लखनऊ। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल की सलाखों से बाहर आ गया है। हरियाणा सरकार ने सोमवार को उसे 30 दिन की पैरोल मंज़ूर की, जिसके बाद मंगलवार को रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा होकर कड़ी सुरक्षा के बीच अपने काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हो गया ।
2017 के बाद से 16वीं बार जेल से बाहर
साल 2017 में साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद से यह 16वाँ अवसर है जब राम रहीम को अस्थायी तौर पर रिहाई मिली है । जेल रिकॉर्ड में “दोषी 8647/सी” के तौर पर दर्ज राम रहीम अपनी अब तक की लगभग साढ़े आठ साल की क़ैद के दौरान 406 दिन बाहर बिता चुका है ।
इसी साल जनवरी में भी मिल चुकी है पैरोल
यह इस कैलेंडर वर्ष में उसकी दूसरी पैरोल है। इससे पहले जनवरी 2026 में शाह सतनाम सिंह की जयंती के अवसर पर उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी । हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 2022 के तहत एक कैदी को कैलेंडर वर्ष में अधिकतम दस सप्ताह की पैरोल दो हिस्सों में ली जा सकती है। ताज़ा 30 दिन की पैरोल के साथ राम रहीम ने इस वर्ष की अपनी पूरी पैरोल सीमा इस्तेमाल कर ली है । हालाँकि, वह इस साल तीन सप्ताह की फर्लो के लिए अभी भी पात्र बना हुआ है।
दो हत्याकांडों में हाल में बरी, बलात्कार की सज़ा जारी
राम रहीम फ़िलहाल साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सज़ा काट रहा है। उसे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामलों में भी उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में इन दोनों मामलों में उसे बरी कर दिया ।
पैरोल और फर्लो में क्या है अंतर?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, पैरोल पर बिताया गया समय सज़ा की कुल अवधि में नहीं गिना जाता, जबकि फर्लो के दौरान बिताया गया वक़्त सज़ा में शामिल माना जाता है । इस तरह पैरोल मिलने से राम रहीम की जेल से बाहर की अवधि तो बढ़ती है, लेकिन इससे उसकी सज़ा पूरी होने की तारीख़ पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
बार-बार पैरोल मिलने पर उठते रहे हैं सवाल
राम रहीम की लगातार मिल रही पैरोल को लेकर राजनीतिक और क़ानूनी हलकों में सवाल उठते रहे हैं । हालाँकि, हरियाणा सरकार और जेल प्रशासन का पक्ष रहा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से क़ानूनी प्रावधानों के तहत हो रही है।









