
कैथल (हरियाणा): हरियाणा में कैथल जिले का ‘प्रेमपुरा’ गांव आज विकास, स्वच्छता और सुरक्षित ग्रामीण सोच की एक अनोखी मिसाल बनकर उभरा है। अपराध और नशे से पूरी तरह मुक्त इस गांव को ‘एनआरआइ गांव’ के नाम से भी जाना जाता है। इस गांव की तकदीर और तस्वीर को बदलने का श्रेय यहाँ की उच्च शिक्षित (एमए पास) महिला सरपंच परविंद्र कौर और उनके पति सतनाम सिंह को जाता है। करीब पांच साल पहले इंग्लैंड से वापस अपने वतन लौटे इस दंपती ने न केवल सरकारी बजट का सही इस्तेमाल किया, बल्कि अपने निजी कोष से करीब 1 करोड़ रुपये गांव के विकास और जनसेवा के कार्यों पर खर्च कर दिए। इनके इस उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला प्रशासन द्वारा गांव की सरपंच को दो बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
सुरक्षा के लिए 28 कैमरे और स्वच्छता में शहरों को मात
करीब 2500 की आबादी वाले इस गांव की गलियां और सड़कें शहरों के सेक्टरों से भी ज्यादा साफ-सुथरी नजर आती हैं। स्वच्छता का आलम यह है कि यहाँ नालियों में भी कचरा दिखाई नहीं देता और कचरे के निस्तारण के लिए विशेष डंपिंग प्लांट लगाया गया है। महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पूरे गांव में 28 सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं और रात की निगरानी के लिए एक सुरक्षा गार्ड भी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गांव में पार्क और ओपन जिम की सुविधा दी गई है, जबकि बच्चों की पढ़ाई के लिए ई-लाइब्रेरी खोलने की प्रक्रिया चल रही है। जल संरक्षण के प्रति भी ग्रामीण बेहद जागरूक हैं और पेयजल को व्यर्थ बहने से रोकने के लिए सप्लाई लाइन में सभी जगह टोंटियां लगाई गई हैं।
निजी जेब से खर्च किए एक करोड़ रुपये
सरपंच परविंद्र कौर ने बताया कि विदेश में रहने के बावजूद उनके मन में हमेशा अपने गांव के विकास और ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारने का विचार आता था। गांव लौटने के बाद जब उन्होंने चुनाव लड़ा, तो ग्रामीणों ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें सरपंच चुन लिया। इसके बाद उन्होंने अपने निजी कोष से 50 लाख रुपये खर्च कर गांव का भव्य मुख्य द्वार बनवाया। साथ ही 18 लाख रुपये की लागत से एक निशुल्क एंबुलेंस खरीदी, जिससे प्रेमपुरा सहित आसपास के 10 गांवों के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मिल रही है। इसके अलावा, उन्होंने जरूरतमंदों के मकान बनवाने व गरीब बेटियों के विवाह पर 25 लाख, पार्क निर्माण पर 5 लाख, सरकारी स्कूल के सुंदरीकरण पर 1.5 लाख और जरूरतमंद लोगों की आंखों के ऑपरेशन पर करीब 5 लाख रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने सरकार से पैरवी कर गांव के पास की ड्रेन पर 22 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण भी कराया है।
8 सालों से नहीं दर्ज हुई कोई एफआईआर
प्रेमपुरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह गांव पूरी तरह से नशा और अपराध मुक्त है। गांव का कोई भी निवासी नशा नहीं करता और नशा रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता को ही मुख्य हथियार बनाया गया है। आपसी भाईचारे की स्थिति यह है कि पिछले 8 सालों से गांव में किसी ने भी किसी के खिलाफ थाने में कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई है। छोटे-मोटे विवादों को ग्रामीण आपस में बैठकर ही सुलझा लेते हैं। प्रेमपुरा का यह भाईचारा और विकास मॉडल आज आसपास के तमाम क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।









