मुख्तार की जमीन पर बने 72 फ्लैट्स खाली करने का अल्टीमेटम, आवंटियों के भारी हंगामे के बाद सिंचाई विभाग बैकफुट पर,नोटिस फाड़ पोता रंग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद हैरान करने वाला और बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। यहां मुख्तार अंसारी के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा बनाए गए प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट्स पर अब बेदखली का संकट मंडराने लगा है। यह वही फ्लैट्स हैं जिनकी चाभियां खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गरीब लाभार्थियों को सौंपी थीं। लेकिन अब अचानक सिंचाई विभाग ने इन 72 फ्लैट्स के परिसर में ‘7 दिन के भीतर कब्जा हटाने’ का एक नोटिस चस्पा कर दिया, जिससे आवंटियों और वहां रह रहे परिवारों में हड़कंप मच गया।

दरअसल, एलडीए (LDA) ने मुख्तार अंसारी के अवैध कब्जे से छुड़ाई गई जमीन पर गरीबों के लिए बेहद खूबसूरत और किफायती 72 फ्लैट्स विकसित किए थे। आवंटी आराम से अपने आशियाने में रह रहे थे, तभी सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर चेतावनी भरा नोटिस चिपका दिया। नोटिस में साफ तौर पर लिखा था कि यह जमीन सिंचाई विभाग की है और इस पर अवैध कब्जा किया गया है, इसलिए 7 दिन के अंदर इसे खाली कर दिया जाए, वरना प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा आवंटित किए गए घरों पर इस तरह का नोटिस देख लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

गरीब परिवारों और आवंटियों का उग्र विरोध देखते ही सिंचाई विभाग और एलडीए के आला अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में मामले को दबाने और अपनी फजीहत से बचने के लिए सिंचाई विभाग की टीम दोबारा मौके पर पहुंची और विवादित नोटिस को वहां से तुरंत हटा लिया। हद तो तब हो गई जब विभाग ने अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए नोटिस वाली दीवार की जगह पर आनन-फानन में नया रंग पोत दिया ताकि कोई सबूत न बचे। दो सरकारी विभागों (एलडीए और सिंचाई विभाग) के बीच जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे इस तालमेल के अभाव ने अब राजधानी की कानून और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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