
वाराणसी पुलिस ने एक बड़े फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड चेन नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बता दे कि गुरुवार को पुलिस ने रोहनिया थानाक्षेत्र में एक तीन मंजिला मकान पर छापा मारकर 250 बेरोजगार युवाओं को मुक्त कराया। चंदा इकट्ठा करने के बाद और लोगों पर MLM में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था।
पुलिस ने इस दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने 19 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने सभी को मीडिया से मिलवाया। पकड़े गए लोगों के पास से पुलिस ने 20 मोबाइल और दो लग्जरी कारें बरामद की हैं।
युवाओं से नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये ठगते थे
DCP क्राइम नीतू कादयान ने बताया- वाराणसी में साइबर क्राइम पर लगाम लगाने के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। इसी क्रम में रोहनिया पुलिस और साइबर क्राइम पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन ने एक इंटरस्टेट गैंग के मुख्य सरगना समेत 19 शातिर साइबर क्रिमिनल्स को गिरफ्तार करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। ये लोग कॉर्पोरेट ऑफिस की आड़ में गैर-कानूनी मल्टीलेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड चेन स्कीम चलाकर देश के अलग-अलग राज्यों के युवाओं से नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये ठगते थे। इस दौरान 300 युवक-युवतियों को उनके चंगुल से आजाद कराया गया है।
एक ऑर्गनाइज्ड साइबर नेटवर्क चला रहा था
डीसीपी क्राइम ने बताया कि – गैंग ‘महादेव एंटरप्राइजेज’ नाम की एक फर्जी कंपनी और ‘रॉयल हेल्थ इंडिया रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग कंपनी की फ्रेंचाइजी लेकर एक ऑर्गनाइज्ड साइबर नेटवर्क चला रहा था।
इसमें शामिल लोग बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश वगैरह से बेरोजगार युवाओं को फोन करके वाराणसी में ऑफिस वर्क/टाटा कंपनी/खेती के काम में ₹25,000 महीने की नौकरी का लालच देते थे। वाराणसी बुलाकर कॉर्पोरेट ऑफिस जैसे माहौल में इंटरव्यू लेते थे और जॉइनिंग फीस/रजिस्ट्रेशन के नाम पर हर व्यक्ति से ₹30,000 से ₹35,000 लेते थे। बदले में उन्हें ₹1,000-₹2,000 की बेसिक किट (कपड़े, तेल, साबुन) दी जाती थी।
युवाओं का साइकोलॉजिकली ब्रेनवॉश किया जाता था
DCP क्राइम ने बताया – इसके बाद ट्रेनिंग सेंटर में युवाओं का साइकोलॉजिकली ब्रेनवॉश किया जाता था। उन्हें लग्ज़री लाइफस्टाइल का लालच देकर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को इस नेटवर्क में जोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था। उन पर हर व्यक्ति 3 नए लोगों को जोड़ने का दबाव डाला जाता था और ऐसा न करने पर उन्हें सैलरी न देने और पैसे वापस न करने की धमकी दी जाती थी।









