अपराध का साम्राज्य या सत्ता का संरक्षण?, अकूत संपत्ति में घिरा निक्की..सरकार बदली आतंक नहीं..,राजनीतिक संरक्षण में पनपता रहा निक्की

रिपोर्ट : हरिपाल,पीलीभीत

पीलीभीत। बीसलपुर नगर पालिका के कर्मचारी उपेंद्र शंखधार की आत्महत्या के मामले में मिले सुसाइड नोट के बाद चेयरमैन के पति अमन जायसवाल उर्फ निक्की का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले ने न केवल आत्महत्या प्रकरण बल्कि अमन जायसवाल के पुराने आपराधिक मामलों और कथित प्रभाव को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अपराध का लंबा इतिहास, रसूख के आगे बेअसर होती रही कार्रवाई,

सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं। साथ अमन जायसवाल उर्फ निक्की पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज है इसमें थाना बिलसंडा, बीसलपुर में कई मुकदमे दर्ज है ।

पुराने आपराधिक मामलों की फिर होने लगी चर्चा

रिपोर्टों के मुताबिक, अमन जायसवाल के खिलाफ पहले भी हत्या के प्रयास, रंगदारी, धमकी, मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में कई मुकदमे दर्ज रहे हैं। खबरों में यह भी सवाल उठाया गया है कि इतने मामलों के बावजूद उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। हालांकि, इन मामलों के अंतिम न्यायिक परिणाम अलग-अलग बताए गए हैं।

सरकार बदली आतंक नहीं.. राजनीतिक संरक्षण में पनपता रहा निक्की

अमन जयसवाल उर्फ निक्की का हमेशा आतंक और रसूख रहा चाहे सरकार समाजवादी पार्टी की रही या फिर भाजपा की दोनों ही सरकारों में निक्की जायसवाल का रुतबा और हनक कभी कम नहीं हुई क्योंकि सत्ता और माननीय का हमेशा कसम खास रहा जिसकी वजह से निक्की का हमेशा आतंक रहा।

अब संपत्ति की भी होगी जांच

दरअसल प्रशासन अब अमन जायसवाल उर्फ निक्की की कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने की तैयारी में है। जांच के दौरान उनकी चल-अचल संपत्तियों, आय के स्रोत और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग, न्याय न मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी,

मृतक उपेंद्र शंखधार के भाई ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन देकर नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो परिवार आंदोलन या आत्मदाह करने की चेतावनी दी है ।

लंबा चौड़ा आपराधिक इतिहास..फिर भी गुंडा एक्ट की कार्यवाही नहीं..

निक्की के हनक और रसूख का अनुमान इससे लग सकता है कि एक दो मुकदमे नहीं बल्कि कई मुकदमे होने के बाबजूद निक्की के खिलाफ पुलिस ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की । क्योंकि जिले के माननीय से खासम खास होने की वजह से किसी अफसर की हिम्मत नहीं पड़ सकी । हालांकि सूबे की सरकार एक दो मुकदमे में गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्यवाही होती है लेकिन यहां सत्ता का संरक्षण, निक्की के हनक से सब कुछ बेबस नजर आता रहा ।

जांच पूरी होने का इंतजार, राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक जवाबदेही,

उपेंद्र शंखधार आत्महत्या प्रकरण अब केवल एक आत्महत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने कथित राजनीतिक संरक्षण, आपराधिक इतिहास और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच पूरी होने पर सामने आएगी ।लेकिन इस घटना के बाद चेयरमैन पति निक्की जायसवाल के आतंक की चर्चा तेजी से हो रही है ।

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