देश की सबसे बड़ी जल सुरंग 15 साल बाद बनकर तैयार, जानिए इस मेगा प्रोजेक्ट की पूरी कहानी

कटनी/जबलपुर। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे बड़ी जल सुरंग बनकर तैयार हो गई है। यह 12 किलोमीटर लंबी और 10.14 मीटर व्यास वाली विशाल सुरंग नर्मदा के अमृत जल को बिना किसी पंप की सहायता से प्राकृतिक बहाव के साथ सोन बेसिन से जोड़ने का काम करेगी। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के दाएं तट पर मुख्य नहर की इस सुरंग के पूरा होने में करीब 15 वर्ष लग गए।

15 साल का लंबा सफर

स्थानीय लोग बताते हैं कि जब इस परियोजना की शुरुआत हुई थी, तब पैदा हुए बच्चे अब बड़े हो गए। सुरंग के प्रवेश द्वार पर पहली शिफ्ट में काम करने वाले मजदूर बुजुर्ग हो चुके हैं और कई सहकर्मी इस ऐतिहासिक सफलता को देखने के लिए जीवित नहीं रहे। मशीनें बदल गईं, ठेकेदार बदले, अधिकारी बदल गए, लेकिन पहाड़ के नीचे काम लगातार जारी रहा।

कई बाधाओं के बाद मिली सफलता

कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव के अनुसार, सलैया फाटक से लेकर खिरहनी गांव तक पहाड़ों के नीचे बनी यह देश की सबसे बड़ी जल सुरंग है। अमेरिका और जर्मनी की मशीनों से पहाड़ का सीना चीरने में कई गंभीर बाधाएं आईं। मशीनों के कटर टूटने, पानी का बहाव अधिक होने और मिट्टी धंसने जैसी दिक्कतों के अलावा सलैया फाटक के पास रेलवे लाइन के नीचे से सुरंग निकालने की स्वीकृति मिलने में ही छह-छह माह लग गए। वर्ष 2022 में मशीन का कटर सुधारने के लिए उसे बाहर निकालने के दौरान बनाए गए सॉफ्ट के धंसने से नौ मजदूर दब गए थे और दो की मौत हो गई थी।

799 करोड़ से बढ़कर 1600 करोड़ पहुंची लागत

वर्ष 2008 में 799 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत यह परियोजना 2011 में शुरू होकर 40 महीने में पूरी होनी थी, लेकिन लगातार आने वाली बाधाओं के कारण काम लेट होता गया और इसकी लागत बढ़कर 1600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

इस सुरंग के बनने से महाकोशल और विंध्य अंचल के छह जिलों की कुल 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसमें कटनी का 21,823 हेक्टेयर, मैहर का 54,227 हेक्टेयर, सतना का 1,04,970 हेक्टेयर, पन्ना का 448 हेक्टेयर, रीवा का 3,084 हेक्टेयर और जबलपुर जिले की करीब 60 हजार हेक्टेयर भूमि शामिल है। इन छह जिलों के 1450 गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अक्टूबर माह से नर्मदा का जल विंध्य तक पहुंचाने की योजना है।

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