
कानपुर : कल तक ठेकेदार साहबों के दफ्तर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते थे “साहब, कोई काम दिलवा दीजिए” की गुहार लगाते हुए। आज तस्वीर बिल्कुल पलट गई है। अब वही साहब सड़क पर उतरकर ठेकेदारों से हाथ जोड़ रहे हैं “भइया, काम ले लो, कमीशन-वमीशन कुछ नहीं चाहिए।” दरअसल 60% कमीशन नगर निगम कानपुर में चलता है। पुलिस की FIR और SIT जांच अलग से। किसी ठेकेदार ने काम लिया तो उसकी पूरी हिस्ट्री निकलेगी, आज नहीं तो कल। इसलिए कोई काम लेना नहीं चाहता।
बता दे कि कानपुर में करप्शन में नए रिकॉर्ड बनाए हैं। दरअसल हुआ यूं कि बारिश ने कानपुर की सड़कों की असलियत सबके सामने ला दी। जगह-जगह गड्ढे, धंसी हुई सड़कें और टूटा-फूटा फुटपाथ शहर की तमाम “उपलब्धियां” धुल गईं। सोशल मीडिया पर जब फजीहत होने लगी और जनप्रतिनिधियों तक बात पहुंची, तब जाकर अफसरों की नींद टूटी। नतीजा यह हुआ कि मंडलायुक्त और नगर आयुक्त खुद सड़कों के निरीक्षण पर निकल पड़े। फरमान जारी हुआ। अगले 15 दिन में शहर को गड्ढामुक्त करना है। लेकिन दिक्कत यह है कि टेंडर निकलने के बावजूद ठेकेदार आगे नहीं आ रहे। जो लोग कभी काम के लिए दर-दर भटकते थे, अब उन्हीं को मनाना पड़ रहा है।
शहर की करीब 300 सड़कें जो नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, केडीए और एनएचएआई के हिस्से आती हैं। इस वक्त बदहाल हैं। सीएम ग्रिड योजना के तहत सारा काम 31 अक्टूबर तक निपटाना है, यानी वक्त बेहद कम बचा है और गड्ढे उससे कहीं ज़्यादा। जाजमऊ इलाके में तो हालात कुछ और ही हैं। यहां 2.4 किलोमीटर सड़क का काम सिर्फ इसलिए अटका पड़ा है क्योंकि फुटपाथ पर अतिक्रमण हो रखा है।
मंडलायुक्त ने अब सख्ती से अतिक्रमण हटवाने के निर्देश दिए हैं। उधर स्वरूप नगर में तो सड़क खोदकर मलबा वहीं छोड़ दिया गया, जिससे राहगीरों को रोज़ जूझना पड़ रहा है। असल वजह है यूटिलिटी शिफ्टिंग सीवर लाइन, पानी की पाइपलाइन, बिजली और गैस की लाइनें बिछाने के चक्कर में सड़कें बार-बार खोदी जा रही हैं, और भुगतना पड़ रहा है आम जनता को।कुल मिलाकर कहानी यही है अफसरों के भ्रष्टाचार, देरी और लापरवाही का खामियाजा अब पूरा शहर भुगत रहा है ।









