
नोएडा के बहुचर्चित और तीन दशक पुराने हाउसिंग विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने मल्टी-स्टोरी फ्लैट्स के असली सदस्यों और बाद के खरीदारों की सही सूची को अंतिम रूप देने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना की अगुवाई में एक सदस्यीय हाई-पावर्ड इंडिपेंडेंट कमेटी का गठन किया है। यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच द्वारा 24 सितंबर को दिया गया।
अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि बार-बार निर्देश दिए जाने और हलफनामा दाखिल होने के बावजूद सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया लगातार बेनतीजा साबित हो रही थी। बड़ी संख्या में मूल आवंटी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से इस मामले के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह पूरा विवाद केंद्रीय कर्मचारी सहकारी जीएन समिति से जुड़े लंबे मामले से उपजा है। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को समिति के 844 पहचाने गए सदस्यों को फ्लैट आवंटित करने और 133 बाद के खरीदारों के दावों की जांच करने का निर्देश दिया था। हालांकि, नोएडा प्राधिकरण और सोसायटी के बीच आंकड़ों को लेकर लगातार मतभेद बने रहे।
नोएडा ने बिना अनुमति ट्रांसफर पर रोक और 1998 में आवंटन रद्द होने का हवाला देकर बाद के खरीदारों का विरोध किया, जबकि सोसायटी ने प्राधिकरण पर ट्रांसफर रिक्वेस्ट पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। इन अड़चनों को दूर करने के लिए गठित नई कमेटी को अपने स्तर पर प्रक्रिया तय करने, दस्तावेजों की जांच करने और सभी पक्षों को सुनने का पूरा अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को आठ हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है, जबकि नोएडा प्राधिकरण को पूरी लॉजिस्टिक और सेक्रेटेरियल मदद मुहैया कराने को कहा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।









