
जनपद सोनभद्र में कुपोषण के खिलाफ एक व्यापक और असरदार सामाजिक परिवर्तन की झलक देखने को मिली है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (ICDS) और अदाणी फाउंडेशन के ‘प्रोजेक्ट सुपोषण’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के जरिए जिले के दूर-दराज इलाकों तक सेहत और सही खान-पान का संदेश पहुँचाया गया। यह पूरा अभियान केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रहकर जन-आंदोलन का रूप लेता नजर आया, जहाँ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और परिवारों को एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
अभियान के दौरान जारी की गई रिपोर्ट इस बात की गवाही देती है कि सोनभद्र में जमीनी स्तर पर कितना गहन काम हुआ है। जिले भर में कुल 14,039 विविध गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें 1,35,874 लोगों की सक्रिय सहभागिता दर्ज की गई। इस आंकड़े से स्पष्ट है कि ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य और पोषण को लेकर जागरूकता की एक नई लहर पैदा हुई है।
घर-घर परामर्श और सामुदायिक संवाद पर जोर
पोषण माह के तहत परिवारों से सीधा संवाद स्थापित करने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया। इसके अंतर्गत 6,959 पारिवारिक परामर्श सत्र आयोजित किए गए, जहाँ कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर परिजनों को शिशुओं की देखभाल और संतुलित आहार के गुर सिखाए। इसके साथ ही, 3,382 फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) के जरिए गर्भवती व धात्री माताओं के साथ-साथ बच्चों के अभिभावकों को कुपोषण के गंभीर परिणामों और उनसे बचाव के रास्तों पर जागरूक किया गया।
स्थानीय संसाधनों से सेहत सुधारने की अनूठी मिसाल
अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें महँगे टॉनिक या बाहरी खान-पान की जगह स्थानीय और सुलभ खाद्य सामग्रियों पर बल दिया गया। इसके लिए 1,288 कुकिंग डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए गए, जिनमें स्थानीय रूप से उपलब्ध पौष्टिक चीजों से स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन बनाने के तरीके प्रदर्शित किए गए। इसके अलावा, घरों में ताजी हरी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के मकसद से जिले भर में 900 पोषण वाटिकाओं का विकास किया गया। वहीं, लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए 358 सुपोषण हेल्प डेस्क, 354 जागरूकता रैलियाँ, 335 पोषण मेले और 97 स्वच्छता अभियान भी चलाए गए।
52 हजार से अधिक बच्चों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
बच्चों में कुपोषण के शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर सही इलाज सुनिश्चित करने के लिए स्क्रीनिंग पर विशेष फोकस रहा। आंकड़ों के मुताबिक, 0 से 5 वर्ष तक के 52,414 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण (स्क्रीनिंग) किया गया। इसके जरिए बच्चों के शारीरिक विकास और वृद्धि दर का सटीक आकलन किया गया, ताकि आवश्यकतानुसार उन्हें चिकित्सकीय मदद और सलाह उपलब्ध कराई जा सके।
माताओं को यह भी समझाया गया कि शिशु के जन्म के शुरुआती दो साल उसके पूरे जीवन की नींव होते हैं। पहले छह महीने तक केवल स्तनपान और उसके बाद पौष्टिक पूरक आहार देना कितना आवश्यक है, इस पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।
प्रशासन और संस्थागत प्रयासों की सराहना
सोनभद्र के जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) विनीत सिंह ने इस महाअभियान के सफल संचालन पर सुपोषण प्रोजेक्ट की टीम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पण की दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि ICDS और अदाणी फाउंडेशन का यह साझा प्रयास मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला रहा है। यह अभियान साबित करता है कि जब सरकारी नीतियां, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय एक साथ मिलकर कदम बढ़ाते हैं, तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती को भी मात दी जा सकती है।









