अदाणी के कच्छ कॉपर प्लांट में एमिशन कम करने की बड़ी तैयारी… 115 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी जोड़ने का प्लान…

अदाणी की कच्छ कॉपर रिफाइनरी मुंद्रा में एमिशन कम करने के लिए 115 MW रिन्यूएबल एनर्जी जोड़ेगी। उत्पादन क्षमता 1 मिलियन टन करने की योजना।

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड ने अपने ऑपरेशन्स को और अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है। कंपनी गुजरात के मुंद्रा स्थित अपनी कॉपर रिफाइनरी में कार्बन एमिशन को कम करने, पानी की बचत करने और रिसोर्स एफिशिएंसी में सुधार लाने के लिए 115 मेगावाट (MW) रिन्यूएबल एनर्जी को अपने ऑपरेशन्स में इंटीग्रेट करने की योजना बना रही है।

वर्तमान में कंपनी 5,00,000 टन सालाना क्षमता वाला कॉपर स्मेल्टर संचालित कर रही है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 1 मिलियन (10 लाख) टन प्रति वर्ष करने की योजना है। इस विस्तार के बाद यह दुनिया का सबसे अपनी तरह का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कस्टम स्मेल्टर बन जाएगा। अपनी पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जैसे-जैसे एनर्जी ट्रांजैक्शन इन्वेस्टमेंट, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और पावर ट्रांसमिशन के कारण मेटल की मांग तेजी से बढ़ रही है, वैसे-वैसे पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानकों को अपने कारोबार में शामिल करना उनकी प्राथमिकता है।

कच्छ कॉपर ने अपनी रणनीति साझा करते हुए बताया कि 115 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का यह प्लान उनके कार्बन फुटप्रिंट को तेजी से घटाने और लंबे समय के डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक अहम कदम है। कॉपर क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए एक बेहद अहम मटीरियल है, जो कार्बन एमिशन को कम करने की वैश्विक कोशिशों के केंद्र में आता है। इसके अलावा, कंपनी पर्यावरण प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स अपनाते हुए सल्फर एमिशन का 99.8 प्रतिशत हिस्सा ट्रीट कर रही है।

जल संरक्षण के मोर्चे पर भी कंपनी ने अनुकरणीय कदम उठाए हैं। कच्छ कॉपर लगभग 100 प्रतिशत डीसैलिनेटेड (लवणमुक्त) पानी पर काम करती है और मीठे पानी पर अपनी निर्भरता को न्यूनतम करने के लिए ‘जीरो-लिक्विड-डिस्चार्ज’ अप्रोच अपना रही है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए अदाणी ग्रुप ने 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने का वादा किया है। समूह का मानना है कि घरेलू कॉपर इंडस्ट्री और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर में यह मजबूत निवेश भारत के 2070 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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