खस्ताहाल सड़के जनता बेहाल, मौज में पीडब्ल्यूडी के अफसर, सड़कों के लिए आवंटित 8914 करोड़ किए सरेंडर

कहाँ तो वादा था की प्रदेश की सड़के गड्डामुक्त होगी. बाकायदा इसके लिए डेडलाइन भी जारी की थी.डेड लाइन बीत गई और सड़के गड्डा मुक्त होती रह गई. यूपी का पीडब्ल्यूडी विभाग एक ऐसा विभाग है जो हमेशा अपने कारनामों के लिए सुर्खियों में रहता है.

लखनऊ : कहाँ तो वादा था की प्रदेश की सड़के गड्डामुक्त होगी. बाकायदा इसके लिए डेडलाइन भी जारी की थी.डेड लाइन बीत गई और सड़के गड्डा मुक्त होती रह गई. यूपी का पीडब्ल्यूडी विभाग एक ऐसा विभाग है जो हमेशा अपने कारनामों के लिए सुर्खियों में रहता है. अब इस विभाग ने एक और बड़ा कारनामा कर दिया है. सरकार ने सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए इस विभाग को जो बजट आवंटित किया था. उसमे से विभाग ने 8914 करोड़ रुपए सरेंडर के दिए है.

यूपी PWD का अब तक सबसे बड़ा कारनामा सामने आया है. यूपी के इतिहास का सबसे बड़ा बजट सरेंडर हुआ है. पीडब्ल्यूडी विभाग ने 8914 करोड़ सरेंडर किए है जोकि विभाग को सड़कों के लिए आवंटित हुए थे. पिछले वित्तीय वर्ष का बजट भी PWD ने लौटाया था.

प्रदेश की सड़कें खस्ताहाल लेकिन विभाग मिली रकम को सरेंडर कर रहा. यूपी के PWD का सड़कों के रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं है. यूपी की सड़कें बेहाल, क्षतिग्रस्त और टूटी हुई हैं.सड़कों को उसी हालत में छोड़, पैसे सरेंडर किए जा रहे है. सड़कों के विकास कार्य का पैसा खर्च ही नहीं किया गया.

पीडब्ल्यूडी विभाग में कई कारनामों को अंजाम देने वाले आरोपी प्रमुख सचिव PWD नरेंद्र भूषण का प्रमोशन हुआ और उनको औद्योगिक विकास के साथ यूपीडा भी कार्यभार दे दिया गया. अलबत्ता जिस पमुख सचिव को सस्पेंड करके जांच बैठनी थी उसको इनाम दे दिया गया.

योगी सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद की भी जवाबदेही तय नहीं हुई. इतनी बड़ी वित्तीय लापरवाही पर कोई एक्शन नहीं हुआ. जहाँ प्रदेश की सड़के खस्ताहाल है कर जनता बेहाल, वहीं विभाग के अफसर मौज में है। उनको जनता की को परवाह नहीं है.

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