
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शराब की दुकानों के लाइसेंस बांटने के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि बार-बार बिना यह साफ किए लाइसेंस जारी कर दिए जाते हैं कि दुकान आखिर किस जगह पर खोली जाएगी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया और न्यायमूर्ति विनय सरन की खंडपीठ ने प्रदेश के आबकारी आयुक्त को पूरी शराब नीति के साथ 12 अगस्त को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
आगरा के रहने वाले विजय कुमार कुलश्रेष्ठ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उनके घर के ठीक सामने एक शराब की दुकान खोल दी गई है, जिससे उनके परिवार को भारी परेशानी हो रही है। इस मामले में कोर्ट ने पहले भी कई आदेश दिए थे। बीते 21 मई के आदेश पर अमल करते हुए आगरा के जिला आबकारी अधिकारी कृष्ण पाल यादव व्यक्तिगत हलफनामा लेकर कोर्ट के सामने पेश हुए थे और आश्वासन दिया था कि याची के घर के सामने बनी इस दुकान को तुरंत बंद कर दिया जाएगा।
इसके बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन के कहने पर मामले की सुनवाई छह जुलाई तक टाल दी गई थी और उस दिन भी उसी अधिकारी को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। याची की ओर से अधिवक्ता श्रीकृष्ण शुक्ल और सरकार की तरफ से स्थायी अधिवक्ता राजेश कुमार पाल ने पैरवी की।









