रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद चार भारतीयों का वर्दी और तिरंगे के साथ अंतिम संस्कार, जानिए पूरी दर्दनाक कहानी

आजमगढ़। रूस-यूक्रेन युद्ध ने आजमगढ़ और मऊ के चार परिवारों से उनके जवान बेटे तो छीन ही लिए, लेकिन उन्हें अपने लाडलों की अंतिम विदाई का अधिकार भी नसीब नहीं हो सका। शव या अवशेष तक न मिल पाने पर परिवारों ने रूस से आई सेना की वर्दी, टोपी, बैज, रूसी ध्वज और मृत्यु प्रमाण पत्र को ही अपने बेटों की अंतिम निशानी मानकर पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। यह हृदय विदारक दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।

कैसे पहुंचे युवक रूस?

आजमगढ़ के योगेंद्र यादव, धीरेंद्र कुमार और अरविंद कुमार को मऊ के विनोद यादव ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर दिल्ली के एजेंट सुमित से मिलवाया था। परिजनों के अनुसार, प्लंबर और सुरक्षा गार्ड की नौकरी का झांसा देकर जनवरी 2024 में चारों को रूस भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें जबरन रूसी सेना में भर्ती कर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के मोर्चे पर झोंक दिया गया। युद्ध के दौरान योगेंद्र और विनोद की यूक्रेन के जापोरिजिया में, जबकि अरविंद और धीरेंद्र की लुहान्स्क में मौत हो गई।

जगदीप बने उम्मीद की कड़ी

इस दुखद गाथा में जालंधर निवासी जगदीप कुमार उम्मीद की कड़ी बनकर सामने आए। उनका भाई भी काम के सिलसिले में रूस गया था और युद्ध में मारा गया। जनवरी 2026 में भारी प्रयासों के बाद वह अपने भाई का शव भारत लाने में सफल रहे। इसी दौरान मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से उन्हें आजमगढ़ और मऊ के चार युवकों की मौत की जानकारी मिली। शव उपलब्ध न होने पर दूतावास ने चारों की वर्दी, टोपी, बैज, रूसी ध्वज और मृत्यु प्रमाण पत्र जगदीप को सौंप दिए।

ऐसे हुआ अंतिम संस्कार

जगदीप इन अंतिम निशानियों को लेकर शुक्रवार को आजमगढ़ पहुंचे और कलेक्ट्रेट से जानकारी लेकर संबंधित परिवारों तक पहुंचाया। योगेंद्र के परिवार ने शुक्रवार को, जबकि धीरेंद्र, अरविंद और विनोद के परिवार ने शनिवार को वर्दी और ध्वज को बेटे का प्रतीक मानकर विधिवत अंतिम संस्कार किया। योगेंद्र के छोटे भाई आशीष ने बताया कि मई 2024 में भाई से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी, बाद में सूचना मिली कि विस्फोट में उनका शरीर पूरी तरह नष्ट हो गया, इसलिए शव नहीं मिल सका।

दोषी एजेंटों पर कार्रवाई की मांग

परिजनों ने नौकरी का झांसा देकर युवकों को युद्ध में झोंकने वाले एजेंटों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को ऐसी सजा मिले, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस असहनीय पीड़ा से न गुजरना पड़े। गौरतलब है कि आजमगढ़ के नौ और मऊ के चार युवक रूस गए थे, जिनमें से 11 की अब तक मौत हो चुकी है और दो अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

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