पुलिस अफसरों को HC की दो टूक, कोर्ट में लंबित केस में मनमाने आदेश नहीं चलेंगे

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि अदालत में लंबित आपराधिक मामलों में पुलिस अपने स्तर से आगे की जांच (Further Investigation) का आदेश नहीं दे सकती। इसके लिए न्यायालय की अनुमति जरूरी है।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कानपुर के संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) की ओर से बिना अदालत की मंजूरी के आगे की जांच के आदेश देने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आवेदन का तरीका ऐसा था, जैसे पुलिस ने पहले ही आगे की जांच का फैसला कर लिया हो और अदालत को केवल इसकी जानकारी दी जा रही हो।कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी का काम केवल अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करना है।

JCP के आदेश को बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संयुक्त पुलिस आयुक्त को किसी लंबित मामले में अदालत की अनुमति के बिना आगे की जांच शुरू करने का अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि अगर पुलिस को लगता था कि मामले में आगे जांच की जरूरत है तो उसे संबंधित अदालत के सामने उचित तरीके से अनुमति मांगनी चाहिए थी। बिना अनुमति के आदेश जारी करना कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

अवैध जांच को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश

अदालत ने JCP के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उस आदेश के आधार पर अब तक की गई जांच का कोई कानूनी महत्व नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसी जांच को रिकॉर्ड से हटाया जाए। हाईकोर्ट के इस फैसले को पुलिस अधिकारियों के लिए एक अहम संदेश माना जा रहा है कि अदालत में विचाराधीन मामलों में जांच प्रक्रिया कानून और न्यायिक अनुमति के अनुसार ही आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

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