
पड़ोसी देश नेपाल में भूकंप के तेज झटकों के कारण ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए उफान और जलप्रलय की चपेट में आने से अब तक 160 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 किलोमीटर तक का दायरा पूरी तरह जलमग्न हो गया है। इस आपदा में 400 से अधिक कैलाश मानसरोवर यात्री लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 133 भारतीय नागरिक और 265 चीनी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न इलाकों में 80 से अधिक सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं।
जलप्रलय का असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी ईस्ट जैसे जिलों में सबसे ज्यादा देखा गया है। बाढ़ के भयानक प्रकोप में कंक्रीट के 22 पुल ढह गए हैं और 42 किलोमीटर लंबी सड़कें बह गई हैं। तिब्बत सीमा पर स्थित इमिग्रेशन ऑफिस भी पानी के तेज बहाव में पूरी तरह नष्ट हो गया है। लगभग एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचने के कारण पूरे नेपाल में गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है।
नेपाल की इस भीषण प्राकृतिक आपदा का असर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूपी सरकार ने महराजगंज और कुशीनगर जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके परिजनों की मदद के लिए राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा 1070 टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है, जिसके जरिए आपातकालीन सहायता पहुंचाई जा रही है।









