हाई कोर्ट ने IAS दुर्गा शक्ति नागपाल पर जताई नाराजगी, आपराधिक अवमानना पर विचार के निर्देश

गोंडा के लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद मामले में सिविल जज को कथित रूप से प्रभावित करने के प्रयास को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने...

लखनऊ। गोंडा के लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद मामले में सिविल जज को कथित रूप से प्रभावित करने के प्रयास को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि गोंडा (देवीपाटन) मंडल की आयुक्त और वरिष्ठ IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा सिविल जज शबीना खान को फोन किए जाने और उन पर कथित दबाव बनाने का मामला प्रथमदृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप जैसा प्रतीत होता है। हाई कोर्ट ने इसे न्याय प्रशासन में बाधा डालने वाला मामला बताते हुए आपराधिक अवमानना के तहत विचार करने की बात कही है।

मामला गोंडा के ज्योति विद्या मंदिर स्कूल और नगर पालिका परिषद गोंडा के बीच वर्ष 1997 से लंबित भूमि विवाद से जुड़ा है। स्कूल की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकारी अधिकारियों की ओर से अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने की।

हाई कोर्ट के सामने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान ने बताया कि 15 जुलाई को उनकी गोंडा मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल से फोन पर बातचीत हुई थी। जज के अनुसार बातचीत में उनकी छुट्टी और अदालत में लंबित मुकदमे का भी जिक्र किया गया। कोर्ट ने कहा कि किसी लंबित न्यायिक मामले को लेकर न्यायाधीश से इस तरह संपर्क करना गंभीर विषय है।

हाई कोर्ट ने कहा- न्यायिक अधिकारियों को बिना दबाव काम करने की स्वतंत्रता जरूरी

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधीनस्थ अदालतों को किसी भी तरह के दबाव, धमकी या प्रभाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। न्यायिक अधिकारियों को बिना भय और दबाव के अपने दायित्वों का निर्वहन करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति या अधिकारी द्वारा अदालत की प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप माना जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

देवीपाटन मंडल के नाम दर्ज नजूल भूमि को लेकर ज्योति विद्या मंदिर स्कूल और नगर पालिका परिषद गोंडा के बीच करीब तीन दशक से विवाद चल रहा है। आरोप है कि सरकारी जमीन पर स्कूल भवन का निर्माण किया गया था। मामला सिविल कोर्ट में साक्ष्य के चरण में लंबित है और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी जारी है।

स्कूल पक्ष ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर अदालत पर दबाव बनाया जा रहा है। इसी आधार पर मामले को गोंडा से बाहर स्थानांतरित करने की मांग हाई कोर्ट में की गई थी।

कोर्ट ने दिए जांच और आगे की कार्रवाई के संकेत

हाई कोर्ट ने कहा कि फोन कॉल से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश से दिशा-निर्देश लेने के बाद मामले को उचित अदालत के समक्ष रखा जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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