
अयोध्या: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में हुंडी (दानपात्र) से चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एक तरफ जहां गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों की काली कमाई और संपत्तियों पर पुलिस की छापेमारी जारी है, वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में हुए बहुचर्चित जमीन घोटाले की आंच एक बार फिर तेज हो गई है। विशेष जांच टीम (SIT) जल्द ही अयोध्या में दूसरे चरण के तहत बड़े पैमाने पर हुए जमीन घोटालों की जांच शुरू करने जा रही है। इसी बीच, ‘भारत समाचार’ की टीम ने इस पूरे खेल के मुख्य मास्टरमाइंड रवि मोहन तिवारी उर्फ चिंटू तिवारी के एक बेहद आलीशान और किलानुमा महल का खुलासा किया है, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
5 मिनट का खेल: 2 करोड़ की जमीन 18 करोड़ में ट्रस्ट को बेची
एसआईटी के पास पहुंचे दस्तावेजों और आरोपों के मुताबिक, रवि मोहन तिवारी ने विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त कर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया। सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब चिंटू तिवारी ने कुसुम पाठक नामक महिला से एक जमीन को महज 2 करोड़ रुपये में खरीदा और उसके ठीक 5 मिनट बाद उसी जमीन को राम मंदिर ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दिया। इस भारी-भरकम मुनाफे और हेरफेर को लेकर तत्कालीन सांसद संजय सिंह ने एसआईटी से मुलाकात कर पुख्ता सबूत भी सौंपे थे। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ट्रस्ट ने सीधे गरीब किसानों से जमीन न खरीदकर रवि मोहन तिवारी जैसे बिचौलियों के माध्यम से इतनी महंगी जमीनें क्यों खरीदीं?
साइकिल से ‘महल’ तक का सफर, साधु-संतों में आक्रोश
स्थानीय सूत्रों और जांच अधिकारियों के अनुसार, कुछ साल पहले तक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला और साइकिल से चलने वाला रवि मोहन तिवारी राम मंदिर ट्रस्ट के साथ जमीनों की इस संदिग्ध डील के बाद अचानक अरबपति बन गया। उसने अयोध्या में एक भव्य, किलानुमा आलीशान महल खड़ा कर लिया है। इस मामले पर अयोध्या के तमाम साधु-संतों और रामभक्तों में गहरा आक्रोश है। संतों का कहना है कि रामलला के नाम पर आने वाले दान का इस्तेमाल कुछ चुनिंदा दलालों को अमीर बनाने के लिए किया गया, जिसकी गहन न्यायिक जांच होनी चाहिए।









