Independence Day: पीएम मोदी ने लाल किले से किया जनता को सम्बोधित, ये हैं मुख्य बिंदु !

आज देश भर में 76 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का समारोह मनाया जा रहा है। इस मौके पर अपनी वार्षिक परंपरा को जारी रखते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ...

आज देश भर में 76 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का समारोह मनाया जा रहा है। इस मौके पर अपनी वार्षिक परंपरा को जारी रखते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे प्रतिष्ठित स्मारकों में से एक – लाल किले से तिरंगा झंडा फहराया। भारत के प्रधान मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों को निष्ठा के साथ पूरा करते हुए, पीएम मोदी ने लाल किले से राष्ट्र ध्वज को फहराने के साथ ही लगातार नौवीं बार राष्ट्र को संबोधित किया।

  1. देश तात्या टोपे, मंगल पांडे, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकउल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल और ब्रिटिश शासन की नींव हिलाने वाले असंख्य क्रांतिकारियों का आभारी है। ‘आजादी महोत्सव’ के दौरान हमने कई राष्ट्रीय नायकों को याद किया है।

  • हर भारतीय गर्व महसूस करता है, जब वह भारतीय महिलाओं की ताकत को याद करता हैं, चाहे वो रानी लक्ष्मीबाई हो, झलकारी बाई हो, चेन्नम्मा, या बेगम हजरत हों। भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है।

  • जब भी हम स्वतंत्रता संग्राम पर बात करते हैं, तब हम आदिवासी समुदाय को भी नहीं भूल सकते, जिसमें कई लोगों जैसे भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, अल्लूरी सीताराम राजू, गोविंद गुरु – ऐसे असंख्य नाम हैं जो इस स्वतंत्रता संग्राम की आवाज बने और आदिवासी समुदाय को मातृभूमि के लिए जीने और मरने के लिए प्रेरित करते रहे।

  • भारत एक आकांक्षी समाज है जहां लोगों की सामूहिक भावना में परिवर्तन हो रहा हैं। भारत के लोग एक सकारात्मक बदलाव चाहते हैं और इसमें योगदान भी देना चाहते हैं। हर सरकार को इस आकांक्षी समाज को संबोधित करना होगा।

  • हमें आजादी मिली तो कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने हमारे विकास पथ पर संदेह किया। मगर उन्हें नहीं ज्ञात था कि इस देश के लोगों के बारे में कुछ अलग है। उन्हें नहीं पता था कि यहां कि मिट्टी खास है।

  • हम 75 साल की यात्रा में, आशाओं, आकांक्षाओं, उतार-चढ़ावों के बीच कई प्रयासों के बाद इस मुकाम तक पहुंचे, जहां हम पहुंच सकते थे। 2014 में, नागरिकों ने मुझे यह जिम्मेदारी दी- आजादी के बाद पैदा हुआ वो पहला व्यक्ति जिसे लाल किले से इस देश के नागरिकों की प्रशंसा करने का अवसर मिला।

  • कर्तव्य पथ पर प्राणों की आहुति देने वाले बापू जी, नेताजी सुभाष चंद्र, बाबासाहेब अम्बेडकर, और वीर सावरकर के प्रति हर नागरिक आभारी हैं। कर्तव्य पथ सदैव ही उनका जीवन पथ रहा है।

बता दें कि 14 अगस्त को हमने बंटवारे देश विभाजन के समय का दर्द भी याद आ गया। देश के आज उन सभी नागरिकों को याद करने का दिन है, जिन्होंने इन पिछले 75 वर्षों में हमारे देश को आगे ले जाने में योगदान दिया है।

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