कृष्ण जन्माष्टमी आज, मथुरा में उमड़ा भक्तों का सैलाब, जानें पूजा का सही समय और विधि

डेस्क : देशभर में आज भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी की धूम है। मथुरा-वृंदावन में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा पहुंच चुके हैं। मंदिरों में विशेष सजावट के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भक्तों को अब आधी रात होने का इंतजार है, जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा।

मथुरा के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ नजर आ रही है। बांके बिहारी मंदिर समेत अन्य मंदिरों में कान्हा के दर्शन और जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। धार्मिक नगरी में चारों ओर कृष्ण भक्ति का माहौल बना हुआ है।

आधी रात को होगा कान्हा का जन्मोत्सव

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की पूजा के लिए रात 12 बजे के आसपास का समय विशेष माना जाता है। साल 2026 में जन्माष्टमी की मुख्य पूजा के लिए 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक का समय निर्धारित बताया गया है। इस दौरान पूजा के लिए करीब 46 मिनट का समय मिलेगा।

इसी अवधि में भक्त बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। मान्यता है कि जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पहले से पूरी कर लें पूजा की तैयारी

जन्माष्टमी की पूजा के लिए भक्तों को मुहूर्त से पहले ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए। पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर पीले या लाल रंग का कपड़ा बिछाया जा सकता है।

मध्यरात्रि के समय लड्डू गोपाल को पूजा की थाली में विराजमान कर पहले पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद गंगाजल से स्नान कराएं। अभिषेक पूरा होने के बाद भगवान को साफ कपड़े से पोंछकर नए वस्त्र पहनाएं।

ऐसे करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार

स्नान और वस्त्र धारण कराने के बाद बाल कृष्ण का श्रृंगार किया जाता है। भगवान को चंदन का तिलक लगाकर मुकुट, बांसुरी और मोरपंख से सजाया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा और आरती की जाती है।

भक्तों के लिए जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने का अवसर है। मथुरा समेत देशभर में भक्त कान्हा के जन्म का इंतजार कर रहे हैं।

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