
लखनऊ। एप्पल के महंगे आईफोन और मैकबुक की बढ़ती कीमतों के बीच दूसरे राज्यों से बिना बिल और ई-वे बिल के माल लाकर बेचने का खेल अब पकड़ में आने लगा है। राज्य कर विभाग की सचल दल द्वितीय इकाई ने चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अमौसी पर अहमदाबाद से लाए जा रहे करीब 40 लाख रुपये मूल्य के आईफोन और मैकबुक पकड़े। माल के साथ न तो बिल था और न ही ई-वे बिल। जांच के बाद विभाग ने 14.32 लाख रुपये अर्थदंड जमा कराया और माल अवमुक्त कर दिया।
कैसे हुई यह कार्रवाई?
लखनऊ जोन-प्रथम के अपर आयुक्त एवं एसआईबी हेड मनोज कुमार विश्वकर्मा के मुताबिक, सचल दल द्वितीय इकाई के सहायक आयुक्त आशीष कुमार और राज्य कर अधिकारी संतोष कुमार ने यह कार्रवाई की। आईफोन-15, आईफोन-17 और मैकबुक-एम2 को अपने कब्जे में लेकर भौतिक सत्यापन के दौरान व्यापारी को नोटिस जारी किया गया। अहमदाबाद के व्यापारी ने माल का स्वामित्व स्वीकार कर लिया, जिसके बाद देय कर की दोगुनी राशि के रूप में 14.32 लाख रुपये अर्थदंड जमा कराया गया।
पहले भी पकड़ा गया है माल
इससे पहले बसों से बिना बिल लाए गए मोबाइल और मोबाइल पार्ट्स के मामलों में करीब 5.66 लाख रुपये अर्थदंड जमा कराया जा चुका है। रेलवे के रास्ते मुंबई और महाराष्ट्र से बिना बिल लाए गए माल को भी सचल दल प्रथम और द्वितीय इकाई ने पकड़ा है।
कीमत बढ़ने से बढ़ा कर चोरी का जोखिम
एप्पल के नए आईफोन-18 की बिक्री भारत में 18 सितंबर से शुरू हुई है। एप्पल ने सितंबर में आईफोन-17 की शुरुआती कीमत 82,900 रुपये रखी थी, जबकि मौजूदा एप्पल स्टोर पर इसकी शुरुआती कीमत 99,900 रुपये है। यानी शुरुआती कीमत में 17,000 रुपये यानी करीब 20.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जून में मेमोरी और स्टोरेज चिप की लागत बढ़ने के बाद एप्पल ने कई मैकबुक मॉडल की कीमतें भी बढ़ाईं। मार्च में यह 69,900 रुपये से शुरू हुई थी, जो अब एप्पल स्टोर पर 79,900 रुपये है। एआई डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग से मेमोरी चिप की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
खुफिया सूचनाओं के आधार पर बढ़ाई जांच
मनोज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान पर जीएसटी की रकम माल की कीमत के साथ काफी बढ़ जाती है। मोबाइल फोन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगती है। महंगे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमत बढ़ने के साथ कर चोरी की आशंका को देखते हुए विभाग ने अब एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बसों और सड़क मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है। यानी दूसरे राज्य से आने वाला महंगा इलेक्ट्रॉनिक माल अब सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि रेल और हवाई मार्ग पर भी जांच के दायरे में है।









