
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) NEET री-एग्जाम के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। एग्जाम से ठीक पहले, उन अधिकारियों और स्टाफ को ट्रेनिंग देने का ऐलान किया गया है, जिन पर री-एग्जाम को ठीक से कराने की ज़िम्मेदारी होगी। NTA ने iGOT कर्मयोगी भारत प्लेटफॉर्म पर ‘परीक्षा कर्मयोगी: एग्जामिनेशन ऑफिसर्स के लिए कैपेसिटी-बिल्डिंग प्रोग्राम’ लॉन्च किया है।
NEET UG री-एग्जाम 2026 से पहले ऑफलाइन, पेन-एंड-पेपर बेस्ड एग्जाम कराने वाले एग्जामिनेशन स्टाफ को ट्रेनिंग देने के लिए NTA ने यह बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी के मुताबिक, यह प्रोग्राम NEET एग्जाम में मॉनिटरिंग को मज़बूत करेगा, परफॉर्मेंस को बेहतर करेगा और यह पक्का करेगा कि बाकी एग्जाम पूरे देश में फेयर, सिक्योर और एक जैसे तरीके से हों।
‘iGOT कर्मयोगी भारत’ क्या है?
iGOT कर्मयोगी भारत भारत सरकार का एक ऑनलाइन लर्निंग और कैपेसिटी-बिल्डिंग प्लेटफॉर्म है। इसे ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को मॉडर्न, डिजिटल और स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग देने के लिए बनाया गया है। NTA ने इस प्लेटफॉर्म पर एग्जामिनेशन ऑफिसर्स इनविजिलेटर्स के लिए ‘परीक्षा कर्मयोगी’ प्रोग्राम शुरू किया है, जो NEET एग्जाम में भी काम आएगा।
अधिकारियों और स्टाफ को क्या सिखाया जाएगा?
‘परीक्षा कर्मयोगी’ प्रोग्राम के तहत, अधिकारियों, खासकर सेंटर सुपरिटेंडेंट और इनविजिलेटर्स (इंस्पेक्टर्स) को NEET UG जैसे ऑफलाइन एग्जाम फेयर, सिक्योर और ट्रांसपेरेंट तरीके से कराने की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसे चार मेन मॉड्यूल में बांटा गया है।
यह कोर्स कौन करेगा ?
यह प्रोग्राम मुख्य रूप से एग्जाम से जुड़े अधिकारियों, खासकर सेंटर सुपरिटेंडेंट और इनविजिलेटर (निरीक्षक) के लिए है, जो NEET (UG) समेत NTA एग्जाम कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। iGOT कर्मयोगी भारत प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया गया यह कोर्स एग्जीक्यूटिव को अपनी गति से सीखने और साथ ही असेसमेंट-बेस्ड सर्टिफिकेशन पूरा करने में मदद करता है। NTA का मानना है कि इससे पूरे देश में एग्जाम एडमिनिस्ट्रेशन के एक जैसे स्टैंडर्ड बनाने में मदद मिलेगी।
NTA ने कहा कि बड़े पैमाने पर नेशनल एग्जाम को आसानी से कराने के लिए अच्छी तरह से ट्रेंड एग्जामिनेशन स्टाफ एक ज़रूरी कदम है। टेक्नोलॉजी-बेस्ड लर्निंग और सर्टिफिकेशन के ज़रिए, एजेंसी का मकसद प्रोसेस कम्प्लायंस को बेहतर बनाना, अकाउंटेबिलिटी को मज़बूत करना और पूरे एग्जामिनेशन इकोसिस्टम को बेहतर बनाना है।









