Sahara Desert Snowfall: तपते सहारा में कैसे गिरती है बर्फ? जानिए क्या है इसके पीछे का विज्ञान

सहारा रेगिस्तान को दुनिया के सबसे गर्म और शुष्क इलाकों में से एक माना जाता है। आमतौर पर यहां दूर-दूर तक सिर्फ सुनहरी रेत दिखाई देती है, लेकिन इस विशाल रेगिस्तान में कई बार बर्फबारी भी दर्ज की गई है। गर्म रेत पर सफेद बर्फ की चादर का नजारा बेहद असामान्य दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे एक खास मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों का मेल होता है।

सहारा में कब हुई थी बर्फबारी?

सहारा में बर्फबारी की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक 18 फरवरी 1979 को अल्जीरिया के ऐन सेफ्रा शहर में दर्ज की गई थी। इसे अक्सर ‘सहारा का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है। भीषण गर्मी वाले इस इलाके में बर्फबारी की घटना ने दुनियाभर का ध्यान आकर्षित किया था।

इसके बाद ऐन सेफ्रा में 2016, 2017, 2018, 2021 और 2022 में भी बर्फबारी देखी गई। इन घटनाओं से पता चलता है कि रेगिस्तान में भी विशेष मौसम परिस्थितियों के दौरान तापमान काफी नीचे जा सकता है और बर्फबारी संभव हो सकती है।

गर्म रेगिस्तान में आखिर कैसे गिरती है बर्फ?

सहारा में बर्फबारी का जवाब वायुमंडलीय परिस्थितियों के एक खास मेल में छिपा है। साल के अधिकांश समय यहां अत्यधिक गर्मी रहती है, लेकिन सर्दियों में दिन और रात के तापमान में काफी अंतर हो सकता है।

यूरोप से आने वाली असामान्य रूप से ठंडी हवा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यूरोप के ऊपर बनने वाले हाई-प्रेशर सिस्टम कभी-कभी ठंडी हवा को सामान्य से अधिक दक्षिण की ओर धकेल देते हैं। यह ठंडी हवा उत्तरी अफ्रीका तक पहुंच सकती है।

जब ऐसी ठंडी हवा पर्याप्त नमी के संपर्क में आती है, तो बर्फबारी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।

फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे पहुंच सकता है तापमान

सहारा में गर्मियों के दौरान दिन का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच सकता है। लेकिन सर्दियों की रातें इसके बिल्कुल विपरीत होती हैं।

रेगिस्तान में बादल कम होने के कारण दिन में जमीन द्वारा जमा की गई गर्मी रात में तेजी से बाहर निकल जाती है। इसी वजह से रात के समय तापमान तेजी से गिर सकता है।

ऐन सेफ्रा के आसपास बर्फबारी की कुछ घटनाओं के दौरान तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे जाकर लगभग -2 से -3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

अगर तापमान शून्य से नीचे हो और हवा में पर्याप्त नमी मौजूद हो, तो पानी की बूंदें बर्फ के क्रिस्टल में बदल सकती हैं। ये क्रिस्टल आपस में जुड़कर बर्फ के टुकड़े बनाते हैं और जमीन पर बर्फबारी के रूप में गिर सकते हैं।

एटलस पर्वत भी निभाते हैं अहम भूमिका

ऐन सेफ्रा की भौगोलिक स्थिति भी यहां होने वाली बर्फबारी की एक वजह है। यह शहर एटलस पर्वत क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर से आने वाली नमी वाली हवा पहाड़ों से टकराकर ऊपर की ओर उठती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा ठंडी होती जाती है। यदि तापमान पर्याप्त नीचे चला जाए तो हवा में मौजूद नमी बर्फ के क्रिस्टल में बदल सकती है।

सहारा में बर्फ ज्यादा देर तक क्यों नहीं टिकती?

रेगिस्तान में बर्फ गिरने के बावजूद वह आमतौर पर ज्यादा समय तक नहीं टिकती। इसका सबसे बड़ा कारण तेज धूप और दिन के तापमान में तेजी से होने वाली बढ़ोतरी है।

सूरज निकलने के बाद जमीन तेजी से गर्म होने लगती है। इसके साथ ही बर्फ पिघलने लगती है या पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है। यही वजह है कि सहारा में बर्फबारी का नजारा जितना असामान्य होता है, उतनी ही जल्दी उसका असर भी खत्म हो सकता है।

क्या जलवायु परिवर्तन है इसकी वजह?

जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न को प्रभावित किया है और वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का चरम और असामान्य मौसम की घटनाओं पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

हालांकि, किसी एक बर्फबारी की घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। सहारा में बर्फबारी को ठंडी हवा, नमी, ऊंचाई और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के एक साथ बनने के परिणाम के रूप में समझा जा सकता है।

यानी दुनिया के सबसे गर्म रेगिस्तानों में से एक सहारा में बर्फबारी भले ही बेहद दुर्लभ हो, लेकिन सही मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां बनने पर यह वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह संभव है।

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