महिला की जगह लिख दिया ‘पुरुष’, 8 साल से भटक रही युवती, न खुला बैंक खाता न मिली छात्रवृत्ति, अब मेडिकल जांच के बाद होगा संशोधन

शामली। व्यवस्था की एक छोटी सी लापरवाही किसी के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण जिले में सामने आया है। 24 वर्षीय युवती फातमा पिछले आठ सालों से अपने ही अस्तित्व और पहचान को साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है। आठ साल पहले आधार कार्ड में संशोधन कराते वक्त ऑपरेटर की गलती से उसके लिंग वाले कॉलम में महिला की जगह ‘पुरुष’ दर्ज कर दिया गया था, जिसके बाद से उसकी जिंदगी मुश्किलों में घिर गई।

कैसे हुई यह गलती?

गांव बलवा निवासी फातमा पुत्री तय्यब ने बताया कि 10 जनवरी 2015 को पहली बार जन्म तिथि सही कराने के लिए आधार में संशोधन का आवेदन किया था। उस समय जन्म तिथि तो ठीक हो गई, लेकिन जेंडर कॉलम में महिला की जगह पुरुष अंकित हो गया। इस पर शुरुआत में ध्यान नहीं गया, लेकिन तीन साल बाद जब किसी काम से आधार कार्ड की जरूरत पड़ी, तब यह गलती नजर आई।

आठ साल की भटकन

31 जुलाई 2018 को फातमा ने दोबारा संशोधन के लिए आवेदन किया, लेकिन बताया गया कि आधार में एक बार ही संशोधन हो सकता है। 2022 में बैंक ऑफ बड़ौदा की आधार हेल्प डेस्क पर गई तो वहां भी यह कहकर लौटा दिया गया कि जेंडर बदलने की लिमिट समाप्त हो चुकी है। मार्च 2026 में फिर प्रयास किया तो पैसे लेकर भी काम नहीं हुआ। इसके बाद जिला मुख्यालय, सहारनपुर स्थित जोनल कार्यालय और अंततः 25 जून 2026 को दिल्ली के अक्षरधाम स्थित आधार मुख्यालय तक पहुंची, लेकिन कहीं से भी समाधान नहीं निकला।

नहीं खुला बैंक खाता, रुकी छात्रवृत्ति

फातमा ने बताया कि इसी साल उसने आईटीआई पास की है और मार्केटिंग में डिप्लोमा भी किया है, लेकिन आधार में जेंडर की इस गलती के कारण न तो उसका बैंक खाता खुल सका और न ही उसे आईटीआई की छात्रवृत्ति मिल पाई। रोजगार के अवसर भी इसी वजह से लगातार प्रभावित हो रहे हैं।

अब मेडिकल जांच के बाद होगा संशोधन

तीन दिन पहले जिला आधार मुख्यालय में बताया गया कि सीएमओ द्वारा प्रमाणित मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही यह संशोधन हो सकता है। गुरुवार को फातमा सीएमओ से मिली, जिन्होंने उसे मेडिकल जांच के लिए भेज दिया। शुक्रवार को शामली सीएचसी में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ने उसे शनिवार को माता-पिता के साथ बुलाया है, ताकि मेडिकल बोर्ड की जांच और रिपोर्ट के आधार पर पुष्टि की जा सके कि वह महिला है और इसके बाद आधार में संशोधन की प्रक्रिया पूरी हो सके।

Related Articles

Back to top button