
लखनऊ। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने इमिग्रेशन नियमों में एक बड़ा और सख्त बदलाव करते हुए F-1 छात्र वीजा, J-1 एक्सचेंज विजिटर और विदेशी पत्रकारों के लिए जारी होने वाले I वीजा धारकों की अमेरिका में रहने की अधिकतम समय-सीमा चार साल तय कर दी है। इस कदम का सीधा असर लाखों भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है, जिससे उनकी चिंता काफी बढ़ गई है।
क्या है नया नियम?
नई नीति के तहत, अब अधिकतर विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स को अमेरिका में केवल अपने निर्धारित शैक्षणिक कोर्स या प्रोग्राम की अवधि तक ही रहने की अनुमति होगी और यह अवधि एक बार में अधिकतम चार साल तक ही सीमित रहेगी। यही नियम I वीजा पर आने वाले विदेशी मीडिया कर्मियों पर भी लागू होगा। इस नियम को 15 सितंबर 2026 से प्रभावी किया जाना है, हालांकि अभी इस पर अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा शेष है।
भारत ने क्या कहा?
बदलते नियमों के बीच भारत सरकार ने कहा है कि वह इस मामले पर करीबी नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए वाशिंगटन से लगातार बातचीत कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अमेरिकी सरकार के संपर्क में है और नीतिगत बदलावों के कारण परेशानी झेल रहे वास्तविक छात्रों और यात्रियों के पक्ष में लगातार आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीजा और इमिग्रेशन से जुड़े नियम बनाना हर देश का अपना संप्रभु अधिकार है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिल्ड टैलेंट लैब्स की को-फाउंडर और सीईओ डेनियल गोल्डमैन ने चेतावनी दी है कि छात्र वीजा नियमों में हुए इस बदलाव से भारत सहित कई देशों के छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ और प्रशासनिक मुश्किलें बढ़ेंगी। उन्हें अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से नौकरी और एंप्लायर स्पांसरशिप हासिल करनी होगी।









