वाराणसी में 50 करोड़ की जमीन घोटाला : 8 महीने पुरानी पावर ऑफ अटॉर्नी 1 दिन में निरस्त; रजिस्ट्री के समय पर उठे सवाल

वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र के मोहनसराय में करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को लेकर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त शिक्षक ओमप्रकाश मिश्रा की करीब 70 बिस्वा जमीन को दानपत्र और बिक्री विलेख (रजिस्ट्री) के जरिए हड़पने के आरोपों की जांच रोहनिया पुलिस ने शुरू कर दी है।

आठ महीने पुरानी पावर ऑफ अटॉर्नी को एक ही दिन में निरस्त करा दिया

शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने पहले ओमप्रकाश मिश्रा की बहू के नाम दर्ज आठ महीने पुरानी पावर ऑफ अटॉर्नी को एक ही दिन में निरस्त करा दिया। इसके बाद उसी दिन शाम को उनके भतीजे विशाल मिश्रा के नाम जमीन का दानपत्र करा दिया गया। आरोप है कि दानपत्र के महज सात घंटे बाद ही उसी संपत्ति की बिक्री रजिस्ट्री भी कर दी गई।

आरोप है कि पूरी प्रक्रिया बेहद जल्दबाजी में पूरी की गई

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया बेहद जल्दबाजी में पूरी की गई। शिकायत में कहा गया है कि शाम 4:38 बजे से 4:41 बजे के बीच विशाल मिश्रा के नाम दानपत्र कराया गया, जबकि उसी रात 11:31 बजे से 11:35 बजे के बीच गंगापुर रजिस्ट्री कार्यालय में संपत्ति की बिक्री कर दी गई।

पुलिस अब दस्तावेजों और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही

वही रजिस्ट्री के समय को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि आमतौर पर रजिस्ट्री कार्यालय का सर्वर शाम 5 बजे के बाद बंद हो जाता है, ऐसे में देर रात रजिस्ट्री कैसे हुई, इसकी जांच जरूरी है। मामले में बीजेपी उपाध्यक्ष सुरेश सिंह समेत अन्य लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं शिकायत में तत्कालीन उपनिबंधक अनिल कुमार और एक लिपिक पर मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस अब दस्तावेजों और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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