‘योगी सरकार ने स्मार्ट मीटर पर फैला भ्रम किया दूर’… UPPCL ने दी पूरी जानकारी… जानें पूरा सच…

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर UPPCL ने भ्रम दूर किया है। सिक्योरिटी राशि और किस्तों को लेकर स्पष्ट किया गया है कि उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी बीच, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने स्मार्ट मीटर और उससे जुड़ी सिक्योरिटी राशि को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में फैलाई जा रही भ्रामक खबरों पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। कारपोरेशन ने साफ किया है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर किसी भी तरह का नया आर्थिक बोझ या अतिरिक्त शुल्क नहीं डाला गया है।

यूपीपीसीएल के अनुसार, जब स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पूर्व में प्रीपेड प्रणाली पर चलाया गया था, तब उनकी जमा सिक्योरिटी धनराशि को नियमानुसार उनके बकाये में समायोजित कर दिया गया था या उनके प्रीपेड खाते में क्रेडिट कर दिया गया था। इसके बाद उपभोक्ताओं की मांग पर जब दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था लागू की गई, तो वही पूर्व की सिक्योरिटी राशि नियमानुसार पुनः जमा कराई जा रही है। इसे नया शुल्क बताना पूरी तरह भ्रामक है।

चार आसान किस्तों में भुगतान की सुविधा

उपभोक्ताओं पर एकमुश्त वित्तीय बोझ न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए यूपीपीसीएल ने इस धनराशि को चार समान मासिक किस्तों में वसूलने का निर्णय लिया है। पहली किस्त जून-2026 की ऊर्जा खपत के बिल (जो जुलाई में जारी हुआ) में शामिल थी, और बाकी तीन किस्तें आगामी तीन मासिक बिलों में स्वतः जुड़कर आएंगी। इसके लिए उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की अतिरिक्त औपचारिकता पूरी करने की जरूरत नहीं है।

डिजिटल माध्यमों से आसानी से मिल रहा है बिल

यूपीपीसीएल ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश के सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को नियमित रूप से मासिक पोस्टपेड बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपभोक्ता ‘यूपीपीसीएल स्मार्ट ऐप’, विभागीय वेबसाइट, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले एसएमएस और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए अपना बिल आसानी से देख और डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी असुविधा से बचने के लिए उपभोक्ता 1912 हेल्पलाइन या आधिकारिक व्हाट्सएप चैटबॉट की मदद भी ले सकते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानें।

Related Articles

Back to top button